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भाद्रपद अमावस्या 2020: इस दिन पितरों के तर्पण से मिलता है पितृदोष से मुक्ति

Mon, 17 Aug 2020 02:55 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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अमावस्या (प्रतीकात्मक तस्वीर)
भाद्रपद मास में कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली अमावस्या को भादप्रद अमावस्या या पिथौरी अमावस्या कहा जाता है। कृष्ण पक्ष में पड़ने के कारण इस अमावस्या का बहुत महत्व बहुत माना गया है।  इस अमावस्या पर पितृ तर्पण आदि धार्मिक कार्यों में कुशा का प्रयोग किया जाता है, इसलिए इसे कुशाग्रहणी अमावस्या भी कहा जाता है। इस अमावस्या पर पितरों का तर्पण करने से पितृ दोष से होने वाली परेशानियों से मुक्ति मिलती है। 
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amavasya 2020 - फोटो : प्रयागराज
पितृ दोष से होने वाली समस्याएं
जिन लोगों को पितृ दोष लगता है। उनके घर में कोई मांगलिक कार्य नहीं हो पाता है। संतान के विकास में बाधा आती है। साथ ही घर में क्लेश की स्थिति बनी रहती है। संतान उत्पत्ति में रुकावट होती है।कार्य क्षेत्र में रुकावटें आने लगती हैं। व्यापार, नौकरी आदि में उन्नति नहीं हो पाती है। इन सभी समस्याओं से निजात पाने के लिए अमावस्या का दिन उत्तम माना जाता है। 
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(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : डेमो
अमावस्या का महत्व 
अमावस्या को पितरों का तर्पण करने से घर में सुख-शांति आती हैं। यह अमावस्या कृष्ण जी को समर्पित है। इस दिन मां दुर्गा की पूजा करने का भी प्रावधान है। इस दिन महिलाएं मां दुर्गा की उपासना करती हैं और अपने पुत्रों की लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं। इस दिन दान करने का भी बहुत महत्व माना गया है। गरीबों को दान करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं। 
 
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(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : AmarUjala
भादप्रद अमावस्या के दिन किसी नदी के तट पर जाकर पितृ तर्पण करना चाहिए। उसके बाद गरीबों को भोजन करवाना चाहिए, और दान करना चाहिए। इससे पूर्वज प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष से आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। नौकरी और कार्य क्षेत्र में उन्नति होती है। संतान सुख प्राप्त होता है। घर और परिवार के सदस्यों की सेहत सही रहती हैं मान-सम्मान में वृद्धि होती है। 
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