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Sawan 2026: शिवलिंग पर 3 पत्तियों वाला बेलपत्र ही क्यों चढ़ाया जाता है? जानें इसके पीछे की मान्यता

Thu, 09 Jul 2026 01:25 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

3 Patti Wala Belpatra: आपने अक्सर देखा होगा कि शिवलिंग पर तीन पत्तियों वाला बेलपत्र ही चढ़ाया जाता है, लेकिन इसके पीछे का कारण जानना भी रोचक है। आइए जानते हैं इसकी धार्मिक मान्यता क्या है...
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शिव पूजा में तीन पत्तियों वाला बेलपत्र क्यों जरूरी - फोटो : AI
Belpatra Ka Mahatva: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दौरान देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है। कोई जल से अभिषेक करता है तो कोई दूध, धतूरा, भांग और बेलपत्र अर्पित कर भोलेनाथ को प्रसन्न करने का प्रयास करता है। इन सभी पूजन सामग्रियों में बेलपत्र का खास महत्व बताया गया है। आपने अक्सर देखा होगा कि शिवलिंग पर तीन पत्तियों वाला बेलपत्र ही चढ़ाया जाता है, लेकिन इसके पीछे का कारण जानना भी रोचक है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बेलपत्र को भगवान शिव का प्रिय माना गया है। कहा जाता है कि बेल वृक्ष की उत्पत्ति माता लक्ष्मी की तपस्या से हुई थी, इसलिए यह अत्यंत पवित्र माना जाता है। शिव पुराण सहित कई ग्रंथों में बेलपत्र अर्पित करने का महत्व विस्तार से बताया गया है। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से चढ़ाया गया बेलपत्र भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करता है और भक्तों की इच्छाओं की पूर्ति करता है।
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तीन पत्तियों वाले बेलपत्र का महत्व - फोटो : adobe stock
तीन पत्तियों वाले बेलपत्र का महत्व
तीन पत्तियों वाला बेलपत्र विशेष आध्यात्मिक अर्थ रखता है। इसकी प्रत्येक पत्ती भगवान शिव के तीन नेत्रों का प्रतीक मानी जाती है, जो ज्ञान, शक्ति और विवेक का प्रतिनिधित्व करते हैं। साथ ही इसे शिव के त्रिशूल के तीनों शूलों से भी जोड़ा जाता है, जो सृष्टि के संतुलन और रक्षा का संकेत देते हैं। इसीलिए तीन पत्तियों वाला बेलपत्र अर्पित करना पूर्ण पूजा का प्रतीक माना जाता है।
 
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सत्व, रज और तम का प्रतिनिधित्व - फोटो : adobe stock
सत्व, रज और तम का प्रतिनिधित्व
एक अन्य मान्यता के अनुसार बेलपत्र की तीन पत्तियां सृष्टि के तीन गुणों, सत्व, रज और तम का प्रतिनिधित्व करती हैं। सत्व शुद्धता और ज्ञान का प्रतीक है, रज क्रियाशीलता और ऊर्जा का, जबकि तम स्थिरता और विश्राम का द्योतक माना जाता है। भगवान शिव इन तीनों गुणों से परे माने जाते हैं। ऐसे में जब भक्त बेलपत्र अर्पित करता है, तो वह अपने भीतर मौजूद इन सभी गुणों को भगवान को समर्पित करने का भाव व्यक्त करता है।

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ब्रह्मा, विष्णु और महेश का स्वरूप - फोटो : adobe stock
ब्रह्मा, विष्णु और महेश का स्वरूप
कुछ मान्यताओं में बेलपत्र की तीन पत्तियों को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का स्वरूप भी माना गया है। यानी एक ही पत्ती के माध्यम से सृजन, पालन और संहार की शक्तियों का सम्मान किया जाता है। यही कारण है कि इसे अत्यंत शुभ और पूजन में अनिवार्य माना गया है।
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बेलपत्र अर्पित करने के नियम - फोटो : AI
बेलपत्र अर्पित करने के नियम
  • पूजा के दौरान बेलपत्र से जुड़े कुछ नियमों का पालन करना भी जरूरी बताया गया है। 
  • हमेशा साफ, ताजा और बिना कटे-फटे बेलपत्र ही चढ़ाने चाहिए। 
  • जिनकी तीनों पत्तियां जुड़ी हुई हों, उन्हें श्रेष्ठ माना जाता है। 
  • कीड़े लगे, सूखे या टूटे हुए बेलपत्र अर्पित नहीं किए जाते। 
  • साथ ही बेलपत्र को धोकर उसकी चिकनी सतह ऊपर की ओर रखते हुए श्रद्धा से शिवलिंग पर चढ़ाने की परंपरा है।
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

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