saraswati puja 2026
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वसंत पंचमी और सरस्वती तत्त्व का अद्भुत संबंध
योग और वेदांत के अनुसार, वसंत पंचमी न केवल ऋतुओं के परिवर्तन का प्रतीक है, बल्कि यह अध्ययन, साधना और नई विद्या आरंभ करने का श्रेष्ठ समय भी माना जाता है। प्राचीन काल से ही गुरुकुलों में विद्यारंभ संस्कार इसी दिन संपन्न होते रहे हैं। माता सरस्वती ज्ञान, विवेक, वाणी और स्मृति की अधिष्ठात्री देवी हैं। उनकी पूजा का उद्देश्य साधक के मन, बुद्धि और चित्त को परिष्कृत करना और अज्ञान के अंधकार को दूर करना है। जैसे बसंत ऋतु में प्रकृति में हरियाली, पुष्प और नवीन जीवन का संचार होता है, वैसे ही सरस्वती की उपासना साधक की चेतना में ज्ञान और विवेक का अंकुर लगाती है।