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वसंत पंचमी में क्यों पहनते हैं पीले वस्त्र और चढ़ाते हैं पीले भोग, जानिए धार्मिक और वैज्ञानिक कारण

Thu, 22 Jan 2026 01:29 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Basant Panchami Yellow Dress: वसंत पंचमी बसंत ऋतु के आगमन का पर्व है और इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है। यह दिन विद्यार्थियों और कलाकारों के लिए खास माना जाता है। वसंत पंचमी पर पीले कपड़े पहनने की परंपरा है क्योंकि पीला रंग खुशी, ज्ञान और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व उत्साह और नई शुरुआत का संदेश देता है।
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Basant Panchami 2026 - फोटो : amar ujala

Why Wear Yellow On Basant Panchami: वसंत पंचमी हिंदू संस्कृति का एक महत्वपूर्ण और शुभ पर्व है, जो शीत ऋतु के अंत और बसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है। इसे श्री पंचमी और ज्ञान पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन विशेष रूप से मां सरस्वती की पूजा की जाती है, जिन्हें ज्ञान, बुद्धि, कला, संगीत और विद्या की देवी माना जाता है। विद्यार्थी, कलाकार और विद्वान इस दिन मां सरस्वती से ज्ञान और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।
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वसंत पंचमी से जुड़ी एक खास परंपरा पीले वस्त्र पहनने की है, जो इस पर्व को और भी आकर्षक बना देती है। पीला रंग न केवल वसंत ऋतु में खिलने वाले सरसों के फूलों और प्रकृति की ताजगी का प्रतीक है, बल्कि इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी है। यह रंग सकारात्मकता, ऊर्जा, ज्ञान और समृद्धि का संकेत माना जाता है। इसी कारण वसंत पंचमी के दिन पीले रंग को अपनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
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वसंत पंचमी - फोटो : adobe stock

पीला रंग वसंत पंचमी का प्रतीक
वसंत पंचमी का त्योहार बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है। इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व माना जाता है। बसंत ऋतु को ‘ऋतुराज’ कहा जाता है क्योंकि यह मौसम सुख-समृद्धि, हरियाली और सौंदर्य का संदेश लेकर आता है। इस मौसम में खेत-खलिहान सरसों के पीले फूलों से ढक जाते हैं। खेतों की हरियाली और सरसों की पीली चादर बसंत ऋतु का मुख्य रूप मानी जाती है। इसी कारण वसंत पंचमी पर पीले कपड़े पहनना प्रकृति के प्रति सम्मान और ऋतु के आगमन का स्वागत माना जाता है।

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पीले कपड़े पहनकर श्रद्धालु देवी सरस्वती को समर्पण और सम्मान प्रकट करते हैं। - फोटो : instagram

वसंत पंचमी पर पीले वस्त्र पहनने का मुख्य कारण
वसंत पंचमी पर पीले वस्त्र पहनने का मुख्य कारण बसंत ऋतु का स्वागत और मां सरस्वती की कृपा प्राप्त करना है। यह सर्दी से बचाव या केवल फैशन के लिए नहीं किया जाता। पीले कपड़े पहनकर श्रद्धालु देवी सरस्वती को समर्पण और सम्मान प्रकट करते हैं।

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पीला वस्त्र पहनकर मां सरस्वती को श्रद्धा और समर्पण दिखाते हैं। - फोटो : instagram

पीला रंग मां सरस्वती का प्रिय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां सरस्वती को सफेद और पीला रंग बहुत प्रिय है। उन्हें अक्सर पीले या हल्के रंग के वस्त्र पहनकर दर्शाया जाता है। पीला रंग सादगी, ज्ञान, बुद्धि और शांति का प्रतीक माना जाता है। इसलिए भक्त पीला वस्त्र पहनकर मां सरस्वती को श्रद्धा और समर्पण दिखाते हैं।

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इस दिन पीला रंग मानसिक स्पष्टता, एकाग्रता और ऊर्जा बढ़ाने में सहायक माना जाता है। - फोटो : instagram

पीला रंग सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक
रंगों का हमारे मन और शरीर पर गहरा प्रभाव होता है। पीला रंग उत्साह, ऊर्जा, उजास और सकारात्मकता का प्रतीक है। यह दिमाग को सक्रिय करता है और मन को प्रसन्न रखता है। बसंत पंचमी पढ़ाई, संगीत और कला के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इस दिन पीला रंग मानसिक स्पष्टता, एकाग्रता और ऊर्जा बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

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पीले रंग की तरंगें मानसिक शांति और शरीर की सक्रियता बनाए रखने में मदद करती हैं। - फोटो : adobe stock

आयुर्वेद और विज्ञान के अनुसार पीले रंग का महत्व

  • आयुर्वेदिक दृष्टि: पीला रंग शरीर के पित्त दोष को संतुलित करता है और गर्माहट व ऊर्जा प्रदान करता है। सर्दियों के बाद जब मौसम हल्का गर्म होने लगता है, पीला रंग शरीर और मन दोनों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
  • वैज्ञानिक दृष्टि: पीले रंग की तरंगें मानसिक शांति और शरीर की सक्रियता बनाए रखने में मदद करती हैं। यह ध्यान, अध्ययन और एकाग्रता के लिए लाभकारी माना जाता है। इसी कारण स्कूलों और संस्थानों में बच्चे और शिक्षक वसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र पहनते हैं।
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पीले भोजन में ऊर्जा और गर्माहट देने वाली सामग्री होती है। - फोटो : instagram
पीले भोजन का महत्व
बसंत पंचमी पर न केवल पीले कपड़े, बल्कि पीला भोजन जैसे केसरिया हलवा, मीठा चावल, खिचड़ी, सरसों का साग आदि भी तैयार किया जाता है। पीले भोजन में ऊर्जा और गर्माहट देने वाली सामग्री होती है। यह शरीर को मौसम के अनुसार मजबूत बनाता है और समृद्धि तथा शुभता का संदेश देता है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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