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बकरीद 2018: कुर्बानी से जुड़ी 10 बातें जिसे हर मुस्लिम को जानना है जरूरी

Wed, 22 Aug 2018 09:25 AM IST
धर्म डेस्क
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ईद अल अजहा यानी बकरीद 22 अगस्त 2018 को मनाई जाएगी। बकरीद में इस्लाम धर्म के अनुयायी खुदा के लिए अपनी तरफ से बड़ी से बड़ी कुर्बानी देते हैं। इस्लाम में बकरों की कुर्बानी दी जाती है इसे लेकर बाजार में काफी चहल-पहल दिखती है।  बकरों की कुर्बानी बकरीद में जरूरी है और इसके लिए इस्लाम में कुछ नियम बताए गए है जिसे पालन करना बहुत जरूरी होता है। 
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हजरत इब्राहिम से खुदा ने कहा कि तुम अपने बेटे की कुर्बानी दो। खुदा ने जब इब्राहिम का जज्बा देख लिया तो उनके बेटे की जगह एक जानवर को बदल दिया। इसके बाद से बकरीद मनाया जाने लगा। बकरीद में अपनी अजीज चीज यानी इच्छाओं को कुर्बान करने करना चाहिए यही खुदा का पैगाम है।
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बकरीद
बकरीद के मौके पर बकरे की कुर्बानी एक प्रतीकात्मक कुर्बानी होती है। लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर किसी को इस मौके पर बकरे की कुर्बानी देनी ही होती है।

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बकरीद मे ऐसे जानवर की कुर्बानी नहीं दी जा सकती जिसमें कोई शारीरिक बीमारी या भैंगापन हो, सींग या कान का अधिकतर भाग टूटा हो या जो शारीरिक तौर से बीमार हो। बहुत छोटे पशु की भी बलि भी नहीं दी जा सकती। कम-से-कम उसे दो दांत यानि एक साल या फिर चार दांत (डेढ़ साल) का होना चाहिए।
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कुरान में कहा गया है कि अल्लाह के पास हड्डियां, मांस और खून नहीं पहुंचता है। पहुंचती है तो खुशु यानी देने का जज्बा।
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कुर्बानी ईद की नमाज के बाद की जाती है, इससे पहले कुर्बानी नहीं दी जा सकती।
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कुर्बानी के बाद मांस के तीन हिस्से होते हैं। एक खुद के इस्तेमाल के लिए, दूसरा गरीबों के लिए और तीसरा रिश्तेदारों के लिए। 

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फुका में कुर्बानी का एक बड़ा नियम यह है कि जिनके पास 613 से 614 ग्राम चांदी हो यानी आज के हिसाब से इतनी चांदी की कीमत के बराबर जिनके पास धन हो उस पर कुर्बानी फर्ज है यानी उसे कुर्बानी देनी चाहिए।

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इसके अलावा कुर्बानी देने वाले के ऊपर उस समय कर्ज नहीं होना चाहिए साथ ही उसके पास उस समय यह धन उपलब्ध होना चाहिए चाहे वह फिक्स डिपॉजिट ही क्यों न हो।

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अगर कोई व्यक्ति कुरान के नियमानुसार अपनी कमाई का ढ़ाई प्रतिशत दान देता है इसके बाद सामाजिक कार्यों में अपना धन कुर्बान करता है तो यह जरुरी नहीं है कि वह बकरे की कुर्बानी दे।
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कुर्बानी का बकरा लाख रुपए का हो या हजार रुपये का हो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। मतलब है कुर्बानी के जज्बे से। जो इंसान दूसरे इंसान का भला करता है अल्लाह सबसे अधिक उसे प्यार करता है। जो प्याऊ लगता है उसकी कुर्बानी सबसे बड़ी मानी जाती है।
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