इसके अलावा हवन का भी आयोजन किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि ये सब करने से भैरव बाबा भक्तों पर आने वाले परेशानियों को टाल देते हैं। यह जगह, तन्त्र-मन्त्र, सिद्धियों, ज्योतिष विद्याओं, तन्त्रोक्त शक्तियों, देव परंपराओं की प्राप्ती का पसंदिदा स्थान रहा है। यह एक शक्ति पीठ है जहा मां सती का दाहिना वक्षस्थल गिरा था। इसलिए इसे स्तनपीठ भी कहा गया है और स्तनपीठ भी अधिष्ठात्री बज्रेश्वरी देवी है। स्तनभाग गिरने पर वह शक्ति जिस रूप में प्रकट हुई वह बज्रेश्वरी कहलाती हैं। मंदिर परिसर में ही भगवान लाल भैरव का भी मंदिर है।
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