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Baby born in pitru paksha: पितृपक्ष में जन्मे बच्चों के जीवन पर होता है कैसा प्रभाव? जानें कितना शुभ और अशुभ

Mon, 15 Sep 2025 03:18 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अक्सर यह सवाल उठता है कि यदि इसी दौरान किसी घर में शिशु का जन्म हो जाए तो इसे शुभ माना जाए या अशुभ? इन दिनों में जन्मे बच्चे का भविष्य कैसा होता है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
 
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कैसा होता है पितृपक्ष में जन्मे बच्चों का भविष्य? - फोटो : Amar Ujala
Baby born in pitru paksha 2025: हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व माना गया है। यह समय मृत पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए समर्पित होता है। परंपरा के अनुसार इन दिनों में पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। हर वर्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा से आरंभ होने वाला पितृपक्ष आश्विन मास की अमावस्या तक चलता है। इस वर्ष यह अवधि 7 सितंबर से शुरू होकर 21 सितंबर तक रहने वाली है। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे शुभ कार्य करने की मनाही होती है।

ऐसे में सवाल उठता है कि यदि इसी दौरान किसी घर में शिशु का जन्म हो जाए तो इसे शुभ माना जाए या अशुभ? इन दिनों में जन्मे बच्चे का भविष्य कैसा होता है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
 
 
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क्या पितृपक्ष में जन्मे बच्चे भाग्यशाली होते हैं? - फोटो : adobe stock
क्या पितृपक्ष में जन्मे बच्चे भाग्यशाली होते हैं?
पितृपक्ष में जन्म लेने वाले बच्चे किसी भी तरह से अशुभ नहीं होते, बल्कि वे परिवार के लिए सौभाग्य लेकर आते हैं। इन पर पितरों की विशेष कृपा रहती है। मान्यता है कि ऐसे शिशु स्वयं अपने कुल के पूर्वजों का ही पुनर्जन्म होते हैं। वे परिवार में नई खुशियां लेकर आते हैं और भविष्य में अपने क्षेत्र में अच्छा नाम कमाते हैं।
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स्वभाव - फोटो : Freepik
स्वभाव
पितृपक्ष में जन्मे बच्चों का स्वभाव हंसमुख होता है। वे रचनात्मक विचारों वाले होते हैं और परिवार से गहरा लगाव रखने वाले होते हैं। इनके अंदर सकारात्मक सोच और सही निर्णय लेने की क्षमता भी होती है। जीवन में ये अक्सर कम उम्र में ही सफलता हासिल कर लेते हैं और अपनी मेहनत के दम पर पहचान बनाते हैं।

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चंद्रमा की स्थिति - फोटो : adobe stock
चंद्रमा की स्थिति
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पितृपक्ष में जन्मे बच्चों की कुंडली में चंद्रमा अक्सर कमजोर पाए जाते हैं। अगर इसका समाधान समय रहते न किया जाए, तो उन्हें मानसिक तनाव जैसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। चंद्रमा को मजबूत बनाने के लिए कुछ उपाय बताए जाते हैं, जैसे चंद्र मंत्र का जप, शिव की उपासना, सोमवार को व्रत रखना या सफेद वस्तुओं का दान करना। इन उपायों से जीवन में संतुलन और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
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कैसा होता है पितृपक्ष में जन्मे बच्चों का भविष्य? - फोटो : adobe stock
पितृपक्ष में जन्मे शिशु अशुभ नहीं, बल्कि परिवार के लिए अत्यंत सौभाग्यशाली माने जाते हैं। उन पर पूर्वजों का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है। हालांकि कुंडली में ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति का ध्यान रखना इनके लिए जरूरी होता है, ताकि जीवन में आने वाली संभावित चुनौतियों से बचा जा सके।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
 
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