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Ayodhya Ram Mandir Flag Hosting: राम मंदिर के शिखर पर होगा केसरिया ध्वज का ध्वजारोहण, विशेष प्रतीक होंगे अंकित

Thu, 20 Nov 2025 12:58 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Ayodhya Ram Mandir Dhwajarohan: अयोध्या में 25 नवंबर को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य शिखर पर भव्य ध्वजारोहण समारोह होगा। 191 फीट ऊँचे ध्वज पर सूर्य और ॐ का प्रतीक अंकित होगा, जो धर्म, साहस और रामराज्य का संदेश देता है।

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अयोध्या राम मंदिर - फोटो : amar ujala
Ram Mandir Dhwajarohan 2025: अयोध्या में 25 नवंबर को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य शिखर पर भव्य ध्वजारोहण समारोह आयोजित किया जाएगा। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि इस ऐतिहासिक ध्वजारोहण का अर्थ है कि मंदिर का निर्माण कार्य अब पूर्ण हो चुका है और मंदिर अपनी दिव्यता के साथ भक्तों के लिए तैयार है।
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चंपत राय के अनुसार, मंदिर के गर्भगृह के मुख्य शिखर की ऊंचाई 160 फीट है, और इसके ऊपर लगाए गए ध्वज-दंड को मिलाकर ध्वज लगभग 191 फीट की ऊंचाई पर लहराएगा। ध्वज-दंड पहले ही स्थापित किया जा चुका है और अब ध्वज को परंपरागत रूप से हाथों से चढ़ाया जाएगा।
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ध्वज का रंग और प्रतीक - फोटो : अमर उजाला
ध्वज का रंग और प्रतीक
अयोध्या में फहराए जाने वाले श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के ध्वज का रंग केसरिया होगा। यह रंग केवल आकर्षक नहीं है, बल्कि धर्म, त्याग और साहस का प्रतीक भी माना जाता है। ध्वज पर सूर्य का चिन्ह अंकित रहेगा, जो ऊर्जा, प्रकाश और जीवन का प्रतीक है। इसके केंद्र में ‘ॐ’ लिखा होगा, जो ब्रह्मांड का प्रथम और परम उच्चारण है। यह चिन्ह आध्यात्मिक शक्ति और दिव्यता को दर्शाता है।
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कोविदार वृक्ष का महत्व - फोटो : freepik
कोविदार वृक्ष का महत्व
ध्वज पर कोविदार वृक्ष का चित्र भी अंकित किया गया है। वाल्मीकि रामायण में इसका उल्लेख मिलता है और इसे अयोध्या के राजवंश का प्रतीक माना जाता है। यह चिन्ह अयोध्या की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है और यह बताता है कि मंदिर सिर्फ धार्मिक केंद्र ही नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है।

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केसरिया रंग त्याग, धर्मनिष्ठा और साहस का प्रतीक है। - फोटो : adobe stock
ध्वज का आध्यात्मिक संदेश
महासचिव चंपत राय के अनुसार यह ध्वज रामराज्य की परिकल्पना का संदेश देता है। केसरिया रंग त्याग, धर्मनिष्ठा और साहस का प्रतीक है। ध्वजारोहण केवल धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि यह जीवन में धर्म, नीति और न्याय की स्थिरता का संदेश भी देता है।
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मंदिर के गर्भगृह के मुख्य शिखर पर यह ध्वज लगभग 191 फीट की ऊँचाई पर फहराया जाएगा। - फोटो : ANI
राष्ट्रीय और सांस्कृतिक महत्व
ध्वजारोहण का कार्यक्रम केवल मंदिर के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे राष्ट्र की सार्वभौम सत्ता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक माना गया है। मंदिर के गर्भगृह के मुख्य शिखर पर यह ध्वज लगभग 191 फीट की ऊँचाई पर फहराया जाएगा, जो इस ऐतिहासिक क्षण की भव्यता को और बढ़ाता है। यह कार्यक्रम अयोध्या और पूरे देश के लिए धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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जारोहण समारोह में आमंत्रित अतिथि और पीएम का आगमन - फोटो : instagram

ध्वजारोहण समारोह में आमंत्रित अतिथि और पीएम का आगमन
अयोध्या में आयोजित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के ध्वजारोहण समारोह में कुल 6000 लोगों को आमंत्रित किया गया है। इनमें 3000 स्थानीय अयोध्या के लोग हैं, जबकि बाकी 3000 बुंदेलखंड, इटावा, फर्रुखाबाद, सीतापुर, हरदोई, लखीमपुर, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती के प्रतिनिधि होंगे। अतिथियों की सूची स्थानीय कार्यकर्ताओं द्वारा तैयार की गई है, और बाहरी लोगों को सीमित संख्या में ही बुलाया गया है। महासचिव चंपत राय के अनुसार इस ऐतिहासिक ध्वजारोहण का वास्तविक आनंद केवल उसी क्षण में उपस्थित होकर ही महसूस किया जा सकता है। 25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समारोह में शामिल होंगे और अयोध्या में लगभग चार घंटे तक रहेंगे, जिससे यह कार्यक्रम धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण बन जाएगा।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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