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Gupt Navratri 2026: कब से शुरू होंगे आषाढ़ गुप्त नवरात्र? जानें घटस्थापना मुहूर्त और पूजा विधि

Sat, 13 Jun 2026 10:25 AM IST
Shweta Singh ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Ashadha Gupt Navratri 2026 Date Ghatasthapana Timing and Simple Puja Rituals
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आषाढ़ गुप्त नवरात्रि - फोटो : amar ujala
Ashadha Gupt Navratri 2026: सनातन धर्म में नवरात्रों का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। यह समय शक्ति की उपासना, साधना और आत्मशुद्धि के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। वर्ष में कुल चार नवरात्र होते हैं-दो सामान्य और दो गुप्त नवरात्र। इनमें से गुप्त नवरात्र विशेष रूप से तांत्रिक साधना, देवी के रहस्यमयी स्वरूपों की आराधना और गहन साधना के लिए प्रसिद्ध हैं। माना जाता है कि इस अवधि में की गई पूजा-अर्चना और साधना शीघ्र फल देती है और साधक को देवी शक्ति की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आषाढ़ माह में आने वाला गुप्त नवरात्र भी इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह नवरात्र आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होता है और नवमी तक चलता है। इस दौरान नौ दुर्गा के साथ-साथ दस महाविद्याओं की भी विशेष पूजा की जाती है, जिससे साधक को आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
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आषाढ़ गुप्त नवरात्र 2026 की तिथि - फोटो : अमर उजाला

आषाढ़ गुप्त नवरात्र 2026 की तिथि
आषाढ़ गुप्त नवरात्र 2026 में आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई की दोपहर से शुरू होकर 15 जुलाई की सुबह तक रहेगी। इसी आधार पर 15 जुलाई 2026 को घटस्थापना की जाएगी और इसी दिन से नवरात्र का आरंभ माना जाएगा। यह पर्व 23 जुलाई 2026 को नवमी तिथि पर समाप्त होगा।

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घटस्थापना मुहूर्त

घटस्थापना मुहूर्त
दृक पंचांग के अनुसार घटस्थापना का शुभ समय 15 जुलाई को सुबह 06:01 बजे से 10:17 बजे तक रहेगा। इस अवधि में पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है।

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जानिए घटस्थापना की विधि

शुभ योग
घटस्थापना के दिन कई महत्वपूर्ण शुभ योग भी बन रहे हैं-

  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:32 से प्रातः 05:16 तक
  • अमृत काल: सायं 04:00 से  सायं 05:27 तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:34 से दोपहर 03:25 तक
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किस दिन किस देवी की पूजा होगी - फोटो : Adobe Stock
किस दिन किस देवी की पूजा होगी
  • 15 जुलाई (प्रतिपदा): शैलपुत्री
  • 16 जुलाई (द्वितीया): ब्रह्मचारिणी
  • 17 जुलाई (तृतीया): चंद्रघंटा
  • 18 जुलाई (चतुर्थी/पंचमी): कूष्मांडा और स्कंदमाता
  • 19 जुलाई (षष्ठी): कात्यायनी
  • 20 जुलाई (सप्तमी): कालरात्रि
  • 21 जुलाई (अष्टमी): महागौरी
  • 22–23 जुलाई (नवमी): सिद्धिदात्री
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पूजा स्थान को साफ करके मां दुर्गा का ध्यान करें। - फोटो : Adobe Stock

पूजन विधि 

  • प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मन को शांत रखें।
  • पूजा स्थान को साफ करके मां दुर्गा का ध्यान करें।
  • विधिवत रूप से घटस्थापना करें, जिसे नवरात्र का आरंभ माना जाता है।
  • दीपक जलाएं और यदि संभव हो तो अखंड ज्योति प्रज्वलित करें।
  • मां दुर्गा को पुष्प, अक्षत, रोली, चंदन और नैवेद्य अर्पित करें।
  • फल, मिठाई और सात्विक भोजन का भोग श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।
  • दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती या देवी मंत्रों का नियमित पाठ करें।
  • नवरात्र के नौ दिनों तक नियमपूर्वक पूजा और साधना जारी रखें।
  • अंत में मां दुर्गा की आरती करें।
  • प्रसाद सभी भक्तों में श्रद्धापूर्वक वितरित करें।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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