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Ashadha Amavasya: आषाढ़ अमावस्या पर करें विशेष चालीसा का पाठ, पितृ होंगे प्रसन्न और देंगे आशीर्वाद

Tue, 24 Jun 2025 10:59 AM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Ashadha Amavasya Par Karein is Chalisa Ka Path: सनातन धर्म के अनुसार पितृ पक्ष पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का विशेष काल होता है। यह भाद्रपद पूर्णिमा से आरंभ होकर आश्विन अमावस्या तक चलता है।
 
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Ashadha Amavasya Pitru Chalisa Path - फोटो : adobe stock
Ashadha Amavasya Pitru Chalisa Path: आषाढ़ अमावस्या 2025 को हिंदू धर्म में पितरों की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन पिंडदान, तर्पण और दान जैसे कर्मों के माध्यम से पूर्वजों को श्रद्धांजलि दी जाती है। मान्यता है कि इस तिथि पर श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए कर्म पितरों की आत्मा को शांति प्रदान करते हैं और वंशजों पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। सुबह स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देना, पीपल वृक्ष की पूजा करना और ज़रूरतमंदों को भोजन या वस्त्र दान करना विशेष फलदायी माना गया है।

इसके साथ ही धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि आषाढ़ अमावस्या के दिन पितृ चालीसा का पाठ किया जाए, तो पितृ विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं। ऐसा करने से न केवल पितृ दोष का निवारण होता है, बल्कि परिवार में सुख, शांति और समृद्धि भी आती है। इस पावन अवसर पर श्रद्धा भाव से चालीसा का पाठ करना आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त करता है।
 
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Ashadha Amavasya Pitru Chalisa Path - फोटो : freepik
आषाढ़ अमावस्या तिथि 
आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि आरम्भ- 24 जून, सायं 06 बजकर 59 मिनट पर
आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का समापन- 25 जून को दोपहर 04:00 बजे तक 
उदयातिथि के अनुसार आषाढ़ अमावस्या 25 जून को मनाई जाएगी। 

 
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Ashadha Amavasya Pitru Chalisa Path - फोटो : amar ujala
पितृ चालीसा

।।दोहा।।
हे पितरेश्वर आपको दे दो आशीर्वाद,
चरण शीश नवा दियो रख दो सिर पर हाथ।
सबसे पहले गणपत पाछे घर का देव मनावा जी।
हे पितरेश्वर दया राखियो,करियो मन की चाया जी।।

चौपाई
पितरेश्वर करो मार्ग उजागर, चरण रज की मुक्ति सागर ।
परम उपकार पित्तरेश्वर कीन्हा, मनुष्य योणि में जन्म दीन्हा ।

मातृ-पितृ देव मन जो भावे, सोई अमित जीवन फल पावे ।
जै-जै-जै पितर जी साईं, पितृ ऋण बिन मुक्ति नाहिं ।

चारों ओर प्रताप तुम्हारा, संकट में तेरा ही सहारा ।
नारायण आधार सृष्टि का, पित्तरजी अंश उसी दृष्टि का ।

प्रथम पूजन प्रभु आज्ञा सुनाते, भाग्य द्वार आप ही खुलवाते ।
झुंझुनू में दरबार है साजे, सब देवों संग आप विराजे ।

प्रसन्न होय मनवांछित फल दीन्हा, कुपित होय बुद्धि हर लीन्हा ।
पित्तर महिमा सबसे न्यारी, जिसका गुणगावे नर नारी ।

तीन मण्ड में आप बिराजे, बसु रुद्र आदित्य में साजे ।
नाथ सकल संपदा तुम्हारी, मैं सेवक समेत सुत नारी ।

छप्पन भोग नहीं हैं भाते, शुद्ध जल से ही तृप्त हो जाते ।
तुम्हारे भजन परम हितकारी,छोटे बड़े सभी अधिकारी ।

भानु उदय संग आप पुजावै,पांच अँजुलि जल रिझावे ।
ध्वज पताका मण्ड पे है साजे, अखण्ड ज्योति में आप विराजे ।

सदियों पुरानी ज्योति तुम्हारी, धन्य हुई जन्म भूमि हमारी ।
शहीद हमारे यहाँ पुजाते, मातृ भक्ति संदेश सुनाते ।

जगत पित्तरो सिद्धान्त हमारा, धर्म जाति का नहीं है नारा ।
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सब पूजे पित्तर भाई ।

हिन्दू वंश वृक्ष है हमारा, जान से ज्यादा हमको प्यारा ।
गंगा ये मरुप्रदेश की, पितृ तर्पण अनिवार्य परिवेश की ।

बन्धु छोड़ ना इनके चरणाँ, इन्हीं की कृपा से मिले प्रभु शरणा ।
चौदस को जागरण करवाते, अमावस को हम धोक लगाते ।

जात जडूला सभी मनाते, नान्दीमुख श्राद्ध सभी करवाते ।
धन्य जन्म भूमि का वो फूल है, जिसे पितृ मण्डल की मिली धूल है ।

श्री पित्तर जी भक्त हितकारी, सुन लीजे प्रभु अरज हमारी ।
निशिदिन ध्यान धरे जो कोई, ता सम भक्त और नहीं कोई ।

तुम अनाथ के नाथ सहाई, दीनन के हो तुम सदा सहाई ।
चारिक वेद प्रभु के साखी, तुम भक्तन की लज्जा राखी ।

नाम तुम्हारो लेत जो कोई, ता सम धन्य और नहीं कोई ।
जो तुम्हारे नित पाँव पलोटत, नवों सिद्धि चरणा में लोटत ।

सिद्धि तुम्हारी सब मंगलकारी, जो तुम पे जावे बलिहारी ।
जो तुम्हारे चरणा चित्त लावे, ताकी मुक्ति अवसी हो जावे ।

सत्य भजन तुम्हारो जो गावे, सो निश्चय चारों फल पावे ।
तुमहिं देव कुलदेव हमारे, तुम्हीं गुरुदेव प्राण से प्यारे ।

सत्य आस मन में जो होई, मनवांछित फल पावें सोई ।
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई, शेष सहस्त्र मुख सके न गाई ।

मैं अतिदीन मलीन दुखारी, करहुं कौन विधि विनय तुम्हारी ।
अब पितर जी दया दीन पर कीजै, अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै ।

दोहा
पित्तरों को स्थान दो, तीरथ और स्वयं ग्राम ।
श्रद्धा सुमन चढ़ें वहां, पूरण हो सब काम ।
झुंझनू धाम विराजे हैं, पित्तर हमारे महान ।
दर्शन से जीवन सफल हो, पूजे सकल जहान।।
जीवन सफल जो चाहिए, चले झुंझनू धाम ।
पितृ चरण की धूल ले, हो जीवन सफल महान।।

 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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