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Apara Ekadashi Vrat: अपरा एकादशी व्रत कैसे रखें? जानें व्रत रखने का सही तरीका और इसके लाभ

Thu, 22 May 2025 05:06 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Apara Ekadashi Vrat Mahatv: अपरा एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह महापापों से मुक्ति दिलाने में सहायक है। इस दिन उपवास और पूजा से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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Apara Ekadashi 2025 - फोटो : adobe
Apara Ekadashi Vrat: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अत्यधिक महत्व है, क्योंकि यह व्यक्ति के जीवन में धार्मिक, आध्यात्मिक और मानसिक शांति लाने का एक साधन है। हर साल 24 एकादशियाँ आती हैं, और इनमें से हर एक का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। इन व्रतों में से अपरा एकादशी, जो ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को आती है, विशेष रूप से पवित्र मानी जाती है। इसे अचला एकादशी भी कहा जाता है और इसे विशेष रूप से भगवान विष्णु की उपासना के लिए माना जाता है।
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शास्त्रों के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और उसे अपने सभी पापों से मुक्ति मिलती है। यह व्रत न केवल वर्तमान जीवन के पापों को समाप्त करता है, बल्कि पूर्व जन्मों के पापों से भी मुक्ति दिलाने का कार्य करता है। इसलिए इस दिन उपवास और पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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Apara Ekadashi 2025 - फोटो : adobe stock
अपर एकादशी का अर्थ 
अपरा एकादशी का अर्थ है वह एकादशी जो अपार फल देती है। यह व्रत व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक उन्नति की ओर मार्गदर्शन करता है और उसे जीवन के सभी दोषों, दुखों और पापों से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है। मान्यता है कि जो भक्त इस व्रत को श्रद्धा और नियमों के अनुसार करते हैं, उनके जीवन की सारी बाधाएँ समाप्त हो जाती हैं। उन्हें शांति, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है, जिससे उनका जीवन सुखमय और सफल हो जाता है।
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Apara Ekadashi 2025 - फोटो : adobe
अपर एकादशी से जुडी कथा  
स्कंद पुराण में अपरा एकादशी व्रत की महिमा के बारे में एक दिलचस्प कथा वर्णित है। कथा के अनुसार, महिष्मति नगरी के राजा महीध्वज के छोटे भाई वज्रध्वज ने लालच में आकर अपने बड़े भाई की हत्या कर दी और उसके शव को एक पीपल के पेड़ के नीचे छुपा दिया। इस कारण राजा महीध्वज की आत्मा उस पेड़ के पास भटकने लगी और पिशाच रूप में वहां रहने लगी। जब महात्मा धौम्य वहां से गुजरे, तो उन्होंने राजा की आत्मा की पीड़ा को समझा और उसके उद्धार के लिए अपरा एकादशी का व्रत रखा। इस व्रत का पुण्य राजा की आत्मा को प्राप्त हुआ और वह पिशाच योनि से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त कर गया। इस कथा से यह सिद्ध होता है कि अपरा एकादशी व्रत न केवल व्यक्ति को पुण्य और शांति प्रदान करता है, बल्कि मृतात्माओं को भी मुक्ति दिलाने का सामर्थ्य रखता है।

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Apara Ekadashi 2025 - फोटो : freepik
अपरा एकादशी व्रत से इन पापों से मिलती है मुक्ति 
अपरा एकादशी व्रत से विभिन्न प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। यह व्रत हत्या, हिंसा, चोरी, छल-कपट, कुपात्र को दान देने, गुरुजनों और ब्राह्मणों का अपमान, झूठ बोलने, गलत आचरण, भ्रष्टाचार, मानसिक और शारीरिक दोषों, और पूर्व जन्मों के पापों से मुक्ति दिलाता है। व्रत करने से आत्मा शुद्ध होती है, मानसिक पीड़ा कम होती है, और व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। इस व्रत से न केवल वर्तमान जन्म के पाप नष्ट होते हैं, बल्कि व्यक्ति के पूर्व जन्मों के पाप भी समाप्त हो जाते हैं, जिससे आत्मा मोक्ष की दिशा में अग्रसर होती है।
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Apara Ekadashi 2025 - फोटो : amarujala
अपरा एकादशी व्रत विधि 
  • अपरा एकादशी के दिन सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान कर लें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 
  • इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। 
  • पीले रंग के वस्त्र, जो भगवान विष्णु को प्रिय माने जाते हैं, पहनना शुभ होता है। 
  • पूजा के लिए एक चौकी लें और उस पर पीले रंग का स्वच्छ कपड़ा बिछाएं। 
  • फिर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को उस पर स्थापित करें। गंगाजल या शुद्ध जल से प्रतिमा को स्नान कराएं और उन्हें पीले वस्त्र पहनाएं या अर्पित करें। 
  • इसके बाद दीप प्रज्वलित करें और भगवान विष्णु को अक्षत, पुष्प, फल, तुलसी दल, पंचमेवा, धूप और नैवेद्य अर्पित करें। 
  • भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें, विशेषकर "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का कम से कम 108 बार जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। 
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी किया जा सकता है। 
  • अंत में भगवान की आरती करें और प्रणाम करके पूजा का समापन करें।
  • दिन भर उपवास रखें, और शाम को पुनः भगवान विष्णु की पूजा करें। अगले दिन द्वादशी तिथि को व्रत का पारण करें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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