अमरनाथ यात्रा 27 जून, बुधवार से शुरू हो चुकी है। अमरनाथ यात्रियों का पहला जत्था भगवती नगर आधार शिविर से रवाना हो गया है। यात्रा का समापन श्रावण पूर्णिमा यानि रक्षाबंधन के दिन होगी। आइए जानते हैं इस अमरनाथ गुफा से जुड़े कुछ रहस्यों के बारे में।
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अमरनाथ की पवित्र गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व की कहानी सुनाई थी। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव साक्षात अमरनाथ गुफा में विराजमान रहते हैं।
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भगवान शिव जब माता पार्वती को अमरकथा सुनाने जा रहे थे तो उन्होंने सबसे पहले पहलगाम में अपने नंदी का त्याग किया था। चंदनबाडी में अपनी जटा से चंदमा को मुक्त किया था।
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AMARNATH YATRA
भगवान शंकर ने गले में धारण सांपों को शेषनाग नामक झील में छोड़ दिया था। इसके बाद शिवजी ने गणेशजी को महागुणस पर्वत पर छोड़ दिया, फिर पंचतरणी में पांचों तत्वों का त्याग किया था।
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भगवान शिव जब माता पार्वती को अमरकथा सुना रहे थें तो उसी समय पार्वतीजी को नींद आ गई। इस दौरान कबूतरों का एक जोड़ा भी इस कथा को सुन रहा था जिसके कारण ये कबूतर भी अमर हो गए। गुफा में आज भी कबूतरों का जोड़ा दिखाई देता है।
ऐसी मान्यता है कि इस गुफा का खोज बूटा मालिक नाम का एक गड़रिए ने थीं। भेडें चराने के दौरान बर्फीले और वीरान इलाके में उसकी मुलाकात एक साधु से हुई थी तब साधु ने बूटा मालिक को कोयले से भरी एक बोरी दी थी। बाद में घर पहुंचने पर सोने में बदल गई। आज भी बूटा मालिक के वंशजो को चढ़ावे का एक हिस्सा दिया जाता है।