फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भक्ति भाव से आमलकी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इसे आंवला एकादशी और आमला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस पावन दिन पर भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, साथ ही आंवले के पवित्र वृक्ष की भी श्रद्धा पूर्वक आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन आंवले के जीवनदायी वृक्ष में स्वयं भगवान विष्णु का वास माना जाता है। क्या आप जानते हैं? आंवला केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आरोग्य और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह न केवल तन को पोषण देता है बल्कि मन को भी शुद्ध करता है।
इस शुभ दिन पर भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष की पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है, समस्त पापों का नाश होता है, और जीवन में सुख, समृद्धि व मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। इस वर्ष यह 10 मार्च 2025, सोमवार को पड़ेगी।