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अगर चाहते हैं कि धन संपत्ति से परिपूर्ण रहे आपका जीवन, तो शास्त्रों में बताई गई इन बातों को हमेशा रखें ध्यान

Thu, 31 Dec 2020 12:21 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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प्रतीकात्मक तस्वीर
हमारे धर्मशास्त्र भले ही बहुत पहले लिखे गए हैं, परंतु आज के जीवन में भी ये उतना ही औचित्य रखते हैं, जितना उस समय था। शास्त्रों में बताई गई बातों को अपने जीवन में उतारकर हम एक संतुष्ट और सुखी जीवन जी सकते हैं। सुखी और समृद्धि के परिपूर्ण जीवन कौन नहीं चाहता है। हर व्यक्ति यह आशा करता है कि उसका जीवन खुशियों और समृद्धि से भरा हुआ हो, लेकिन एक सुखी और समृद्धि भरा जीवन जीने के लिए व्यक्ति को प्रयास भी करने पड़ते हैं। तो चलिए जानते हैं कि शास्त्रों में इस बारे में क्या बताया गया है।
 
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worship
इन तिथियों सात्विक रखें अपना आचरण
हिन्दू शास्त्रों के अनुसार मनुष्य को हर माह की अष्टमी, एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या और चतुर्दशी तिथि पर धार्मिक नियमों का पालन करते हुए अपने आचरण को सात्विक रखना चाहिए। इन तिथियों पर भूलकर भी मांस मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। शरीर पर तेल मालिश नहीं करना चाहिए। इन तिथियों पर प्रणय संबंध भी नहीं बनाने चाहिए। पूर्णतया ब्रह्मचार्य का पालन करना चाहिए।
 
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worship
पूजा के समय ध्यान रखें ये बातें
हिन्दू धर्म ईश्वर की प्रतीक प्रतिमाओं का पूजन करने की परंपरा है। पूजा-पाठ करने से संबंधित बातों को ध्यान में रखना भी आवश्यक होता है। पूजा करते समय ध्यान रखें कि पूजा-पाठ की कोई भी समाग्री या शंख, शालिग्राम आदि अशुद्ध जगह या जमीन पर बिना आसन के न रखें। इन सभी चीजों को लाल रंग का स्वच्छ कपड़ा बिछाकर या फिर चावल का आसन देकर रखना चाहिए।
 

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maa lakshmi
पराई स्त्री पर न रखें बुरी नजर, न करें महिला का अपमान
धर्म शास्त्रों में स्त्री को अन्नपूर्णा और लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है, इसलिए कभी भी पराई स्त्री पर नजर नहीं रखनी चाहिए और न ही अपने घर की महिलाओं का अपमान करना चाहिए। पुराणों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि जो पुरुष पर स्त्री पर बुरी नजर रखता है, या नारी का अपमान करता है, वह कभी सुखी जीवन व्यतीत नहीं कर सकता है। ऐसे लोगों के यहां हमेशा दरिद्रता निवास करती है। 
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डूबते सूरज को नहीं देखना चाहिए (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : pexel
सूर्यास्त के बाद न करें ये काम
उगते सूर्य के दर्शन और पूर्णिमा के चांद को निहारना बहुत अच्छा माना जाता है, लेकिन शास्त्रों के अनुसार कभी भी सूर्य और चंद्रमा के अस्त होते समय दर्शन नहीं करने चाहिए। जो लोग अस्त होते सूर्य को देखते हैं उनमें नकारात्मकता का भाव आने लगता है। ऐसे लोगों को निराशा घेरने लगती है।
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दान
करते रहें निस्वार्थ भाव से दान-पुण्य
हर धर्म में दान-पुण्य का बहुत महत्व माना जाता है। धर्म शास्त्र कहते हैं कि हर व्यक्ति को निस्वार्थ भाव से दान कर्म करना चाहिए। हर समय जरूरतमंदों की सहायता के लिए तत्पर रहना चाहिए, लेकिन हमेशा ध्यान रखें की अपने द्वारा किए गए दान का बखान न करें। इस तरह किया गया दान फल नहीं देता है। दान को हमेशा गुप्त रखना चाहिए।  इससे आपको आत्मिक शांति, मन की संतुष्टि प्राप्त होती है। दान कर्म करने से जीवन के बड़े से बड़े संकट को भी टाला जा सकता है। 
 
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बुजुर्गो का आदर करना चाहिए (प्रतीकात्मक तस्वीर)
बड़े बुजुर्गों का सम्मान
हमारे शास्त्रों में जितना महत्व उपवास, दान,जप-तप और ईश्वर पूजा का बताया है, उतना ही महत्व घर के बुजुर्गों और बड़ों का सम्मान करने का भी बताया गया है। हर व्यक्ति को अपने से बड़े बुजुर्गों, माता-पिता और गुरूओं का सम्मान करना चाहिए एवं अपने से छोटो के साथ प्रेम का भाव रखना चाहिए। 
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