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Akshaya Tritiya 2020: बहुत पवित्र और शुभ तिथि मानी जाती है अक्षय तृतीया, मिलता है अक्षय फल

Sun, 26 Apr 2020 02:47 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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Akshaya Tritiya 2020
अक्षय तृतीया आखा तीज के नाम से भी जानी जाती है। अक्षय तृतीया सभी तिथियों में सबसे शुभ तिथि मानी गई है। इस तिथि पर सभी तरह के शुभ कार्य बिना पंचांग देखे किए जा सकते हैं। हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया सभी पापों का नाश करने वाली एवं सभी सुखों को प्रदान करने वाली शुभ तिथि है। इस तिथि पर किया गया कोई भी शुभ कार्य जरूर सफल होता है। लोगों को इस तिथि का इंतजार साल भर रहता है। इस तिथि को विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यापार , धार्मिक अनुष्ठान और पूजा- पाठ के लिए सर्वश्रेष्ठ तिथि मानी गई है। सोना खरीदने के लिए अक्षय तृतीया तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है। साल 2020 में अक्षय तृतीया व्यापिनी और रोहिणी नक्षत्र के संयोग में मनाई जाएगी।
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अक्षय तृतीया 2020
अक्षय तृतीया का महत्व
अक्षय तृतीया पर किए जाने वाले सभी तरह के शुभ कार्यों में सफलता और अक्षय फल की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में यह अबूझ मुहूर्त है। अक्षय तृतीया पर देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। देवी लक्ष्मी के साथ इस दिन भगवन विष्णु की भी पूजा होती है। अक्षय तृतीया पर पूजा करने से शुभफल की प्राप्ति होती है।
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akshaya tritiya
अक्षय तृतीया पर भूलकर भी न करें ये काम
शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया बहुत ही शुभ तिथि होती है। इस तिथि में किसी भी तरह का किया गया शुभ कार्य जरूर सफल होता है। ऐसे में अक्षय तृतीया पर भूलकर भी कुछ  काम नहीं करना चाहिए।
- अक्षय तृतीया पर किसी को दुख नहीं पहुंचाना चाहिए।
- अक्षय तृतीया पर किसी भी तरह का गलत कार्य करने से बचने चाहिए।
- इस दिन पूरे दिन सादा भोजन करना चाहिए और व्रत के नियमों का पालन करना चाहिए।
 
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akshaya tritiya
अक्षय तृतीया से जुड़ी मान्यताएं-
अक्षय तृतीया के त्योहार से जुड़ी कई तरह की मान्यताएं है।

- मान्यताओं के मुताबिक अक्षय तृतीया पर ही सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत हुई थी।
- वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की अक्षय तृतीया तिथि पर भगवान विष्णु के अवतार परशुराम का जन्म हुआ था।
- इसी तिथि पर मां गंगा का धरती पर आगमन हुआ था।
- ऐसा माना जाता है कि महर्षि वेद व्यास ने अक्षय तृतीया के दिन से महाभारत लिखना शुरू किया था। 
 
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