ahoi ashtami 2020
अहोई अष्टमी को महिलाएं संध्या काल में पूरे विधि-विधान के साथ अहोई माता की पूजा करती हैं और अपनी संतान की लंबी उम्र एवं अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं। तारों की छांव में अर्घ्य देती हैं। इस दिन अहोई माता की पूजा में चांदी की अहोई बनाते हैं, जिसे स्याहु कहा जाता है। रोली, अक्षत, दूध, और भात से इसकी पूजा की जाती है, इसके बाद एक कलावा लेकर उसमे स्याहु का लॉकेट और चांदी के दाने डालकर माला बनाई जाती है। व्रत करने वाली माताएं इस माला को अपने गले में अहोई से लेकर दिवाली तक धारण करती हैं। इस माला की पूजा पूरे विधि-विधान से करनी चाहिए। जानते हैं कि इस माला को पहनने का क्या महत्व है।