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Aaditya Hridaya Stotra Niyam: यदि नियम से करेंगे आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ, तो सूर्य देव चमका देंगे किस्मत

Fri, 15 Jul 2022 01:50 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ
Aaditya Hridaya Stotra Niyam: ज्योतिष शास्त्र में सूर्यदेव ग्रहों के अधिपति माने जाते हैं। सनातन धर्म में सूर्य देवता के रूप में पूजनीय है। सूर्य एक प्रत्यक्ष देवता है। वह समस्त संसार की ऊर्जा का केंद्र है। नवग्रहों में सूर्यदेव को सबसे विशिष्ट स्थान प्राप्त है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को पिता, पुत्र, प्रसिद्धि, यश, तेज, आरोग्यता, आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति का कारक माना गया है। सूर्य की आराधना से व्यक्ति को सूर्य के समान तेज और यश की प्राप्ति होती है। सूर्य को मजबूत करने के लिए आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना सर्वोत्तम माना जाता है। यदि इस स्तोत्र का पाठ प्रतिदिन सुबह नियमित रूप से किया जाए तो मनुष्य के जीवन में बहुत जल्दी ही सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलते हैं। इस पाठ को करने से जातक को की तरह के लाभ प्राप्त होते हैं और जीवन की समस्याओं से निजात मिलती है। तो चलिए जानते हैं इस पाठ को करने की विधि और इससे मिलने वाले लाभ।
 
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आदित्य हृदय स्तोत्र
आदित्य हृदय स्त्रोत क्या है
आदित्य हृदय स्तोत्र  सूर्य देव से संबंधित है। इस स्तोत्र का पाठ सूर्य देव को प्रसन्न व उनकी कृपा पाने के लिए किया जाता है। आदित्य हृदय स्तोत्र का उल्लेख रामायण में वाल्मीकि जी द्वारा किया गया है जिसके अनुसार इस स्तोत्र को ऋषि अगस्त्य ने भगवान श्री राम को रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए दिया था।शास्त्रों में इस स्त्रोत का पाठ करना बहुत ही शुभ व लाभकारी बताया गया है। ज्योतिषशास्त्र में भी आदित्य हृदय स्तोत्र को काफी महत्व दिया गया है। इस स्तोत्र का नित्य पाठ करने से जीवन के अनेक कष्टों का निवारण होता है।
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आदित्य हृदय स्त्रोत पाठ की विधि
आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ की विधि-
  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और एक तांबे के लोटे में जल लेकर रोली या चंदन और पुष्प डालकर सूर्य को अर्पित करें।
  • सूर्य को जल देते समय गायत्री मंत्र का जाप करें और वही सूर्यदेव के समक्ष आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।
  • इस पाठ को यदि शुक्ल पक्ष के किसी रविवार को किया जाए तो उत्तम रहता है।
  • यदि इस पाठ का पूर्ण फल प्राप्त करना चाहते हैं तो नित्य सूर्योदय के समय इसका पाठ करना चाहिए।
  • पाठ समाप्त हो जाने के पश्चात सूर्य देव का ध्यान करते हुए उन्हें नमस्कार करें।
  • यदि प्रतिदिन पाठ नहीं कर सकते तो प्रत्येक रविवार को भी कर सकते हैं।
  • आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करते हो उन्हें रविवार के दिन मांसाहार, मदिरा तथा तेल का प्रयोग न करें। संभव हो तो रविवार को नमक का सेवन भी न करें।

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आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ के फायदे - फोटो : surya
आदित्य हृदय स्तोत्र के लाभ
  • आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और वह कार्य क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करता है।
  • यदि किसी व्यक्ति में आत्मविश्वास की कमी हो तो उसके लिए यह पाठ रामबाण उपाय है।
  • इस पाठ को करने से मन का भय दूर होता है और नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है।
  • यदि कोई सरकारी विवाद चल रहा हो तो भी आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना लाभकारी होता है, प्रशासनिक अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होता है।
  • सूर्य को पिता का कारक माना गया है। आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ करने से पिता पुत्र के संबंध अच्छे होते हैं।
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सूर्य
किनको इसका पाठ करना करना चाहिए-
  • अगर राज्य पक्ष से पीड़ा हो, कोई सरकारी मुकदमा चल रहा हो। 
  • लगातार रोग परेशान कर रहें हों, ख़ासतौर से हड्डियों या या आंखों के रोग। 
  • अगर आंखों की समस्या गंभीर रूप से परेशान कर रही हों। 
  • जीवन के किसी भी बड़े कार्य में सफलता के लिए भी इसका पाठ उत्तम होगा। 
  • जो लोग प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी कर रहे हों, ऐसे लोगों को शीघ्र सफलता के लिए इसका पाठ करना चाहिए। 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये खबर लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस खबर में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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