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भारत के सबसे बड़े दार्शनिक हैं आदिगुरु शंकराचार्य, जानें दक्षिण के इस संत का मप्र के ओंकारेश्वर से संबंध

Thu, 21 Sep 2023 03:45 PM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Adiguru Shankaracharya - फोटो : अमर उजाला
Adiguru Shankaracharya: आदि गुरु शंकराचार्य भगवान शिव के अंशावतार माने जाते हैं। उन्होंने हिंदू धर्म के प्रचार-प्रसार में अपना पूरा जीवन व्यतीत कर दिया। आदि शंकराचार्य ने जन-जन तक वेदों के ज्ञान को पहुंचाने के लिए देश भर में भ्रमण किया और चार मठों की स्थापना की। आदि शंकराचार्य बचपन से ही प्रतिभाशाली थे। उनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने दो वर्ष की अल्प आयु में वेदों, उपनिषद, रामायण, महाभारत को कंठस्थ कर लिया था। वहीं सात वर्ष की आयु में प्रवेश करते ही शंकराचार्य ने संन्यास धारण कर लिया था। हिंदू धर्म में शंकराचार्य की उपाधि सर्वोच्च मानी जाती है। आज यानी 21 सितंबर 2023 को मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य की 108 फीट की प्रतिमा का अनावरण किया जा रहा है। ऐसे में चलिए जानते हैं आदि गुरु शंकराचार्य कौन थे, उनका जन्म कहां हुआ था और ओंकारेश्वर से उनका क्या संबंध है... 
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Adiguru Shankaracharya - फोटो : Facebook
कौन थे आदि शंकराचार्य?
भगवान के अंशावतार माने जाने वाले आदि गुरु शंकराचार्य का जन्म आठवीं सदी में केरल के कालड़ी गांव के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनके माता-पिता शिव जी के परम भक्त थे। माना जाता है कि स्वंय भगवान शिव ने शंकराचार्य के रूप में जन्म लिया था। उनका नाम शंकर रखा गया, जो आगे चल कर आदि गुरु शंकराचार्य कहलाए। 
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Adiguru Shankaracharya - फोटो : Facebook
अल्प आयु में ही था वेदों का ज्ञान 
आदि गुरु शंकराचार्य ने अल्प आयु में चार वेदों का ज्ञान अर्जित कर लिया था। इसके बाद बारह वर्ष की अवस्था में वे सभी शास्त्रों में पारंगत हो गए थे। 16 वर्ष की अवस्था में 100 से भी अधिक ग्रंथों की रचना कर चुके थे। बाद में माता की आज्ञा से वैराग्य धारण कर लिया था। जगद्गुरु शंकराचार्य ने भारत के चार भागों में चार मठों की स्थापना भी की, वे मठ हैं- श्रृंगेरी पीठ, ज्योतिषपीठ बदरिकाश्रम, पुरी गोवर्धन पीठ और द्वारिका शारदा पीठ। 

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Adiguru Shankaracharya - फोटो : Facebook
आदि गुरु शंकराचार्य का जीवनकाल मात्र 32 साल का रहा, लेकिन इस अवधि में उन्होंने सनातन धर्म और वैदिक ज्ञान को पुनः जीवित कर दिया। उनके द्वारा बताए मार्ग आज भी संतों का और सनातन धर्म में आस्था रखने वाले भक्तों का मार्गदर्शन करते हैं। 
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Adiguru Shankaracharya - फोटो : Facebook
ओंकारेश्वर से आदि गुरु शंकराचार्य का संबंध 
आज तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में जगतगुरु आदि शंकराचार्य की 108  फीट ऊंची प्रतिमा 'स्टेच्यू ऑफ वननेस' का अनावरण किया जा रहा है। यह पूरी दुनिया में शंकराचार्य की सबसे ऊची प्रतिमा है। ओंकारेश्वर को शंकराचार्य की दीक्षा स्थली मानी जाती है। कहा जाता है कि यहां वे अपने गुरु गोविंद भगवत्पाद मिले और यहीं चार वर्ष रहकर उन्होंने विद्या अध्ययन किया था।
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