Adiguru Shankaracharya: आदि गुरु शंकराचार्य भगवान शिव के अंशावतार माने जाते हैं। उन्होंने हिंदू धर्म के प्रचार-प्रसार में अपना पूरा जीवन व्यतीत कर दिया। आदि शंकराचार्य ने जन-जन तक वेदों के ज्ञान को पहुंचाने के लिए देश भर में भ्रमण किया और चार मठों की स्थापना की। आदि शंकराचार्य बचपन से ही प्रतिभाशाली थे। उनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने दो वर्ष की अल्प आयु में वेदों, उपनिषद, रामायण, महाभारत को कंठस्थ कर लिया था। वहीं सात वर्ष की आयु में प्रवेश करते ही शंकराचार्य ने संन्यास धारण कर लिया था। हिंदू धर्म में शंकराचार्य की उपाधि सर्वोच्च मानी जाती है। आज यानी 21 सितंबर 2023 को मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य की 108 फीट की प्रतिमा का अनावरण किया जा रहा है। ऐसे में चलिए जानते हैं आदि गुरु शंकराचार्य कौन थे, उनका जन्म कहां हुआ था और ओंकारेश्वर से उनका क्या संबंध है...