पंचांग और ऋतु चक्र के संतुलन को बनाए रखने के लिए इस अतिरिक्त समय को एक अलग महीने ।
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तीन साल में एक बार आता है अधिक मास
अधिक मास हर तीन साल में एक बार इसलिए आता है क्योंकि हिंदू पंचांग की गणना सूर्य और चंद्रमा दोनों की गति के आधार पर की जाती है। सौर वर्ष करीब 365 दिनों का होता है, जबकि चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों में पूरा हो जाता है। ऐसे में दोनों के बीच हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर पैदा हो जाता है। यही अंतर धीरे-धीरे बढ़ते हुए करीब तीन साल में एक पूरे महीने के बराबर हो जाता है। पंचांग और ऋतु चक्र के संतुलन को बनाए रखने के लिए इस अतिरिक्त समय को एक अलग महीने के रूप में जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस महीने में सूर्य किसी नई राशि में प्रवेश नहीं करता, इसलिए इसे पहले मलमास कहा जाता था। बाद में भगवान विष्णु ने इसे अपना प्रिय और पवित्र महीना घोषित किया, जिसके बाद इसका नाम पुरुषोत्तम मास पड़ गया। तभी से इस महीने को पूजा-पाठ, जप, तप और दान के लिए बेहद शुभ माना जाता है।