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Adhik Maas 2026: शुरू हुआ अधिकमास, इन कार्यों से रहें दूर वरना बढ़ सकती हैं परेशानियां

Sun, 17 May 2026 12:10 PM IST
Shweta Singh ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

आज से पुरुषोत्तम मास की शुरुआत हो रही है। हिंदू धर्म में इस पवित्र महीने को विशेष पूजा, दान और भगवान विष्णु की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। जानें शास्त्रों के अनुसार पुरुषोत्तम मास में क्या करना चाहिए, किन कार्यों से बचना चाहिए।
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अधिक मास 2026 प्रारंभ - फोटो : अमर उजाला
Adhikmaas: हिंदू धर्म में अधिक मास को बेहद पुण्यदायी और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर समय माना जाता है। आज से शुरू हो रहा यह पवित्र महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दौरान पूजा-पाठ, दान, जप और तप करने से कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है। हालांकि, इस पूरे महीने में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों को वर्जित माना गया है। शास्त्रों के अनुसार अधिक मास आत्मचिंतन, भक्ति और धर्म-कर्म के जरिए जीवन में सकारात्मकता लाने का विशेष अवसर होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि पुरुषोत्तम मास क्यों खास माना जाता है और इस दौरान किन नियमों का पालन करना जरूरी बताया गया है।
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पंचांग और ऋतु चक्र के संतुलन को बनाए रखने के लिए इस अतिरिक्त समय को एक अलग महीने । - फोटो : Adobe Stock
तीन साल में एक बार आता है अधिक मास 
अधिक मास हर तीन साल में एक बार इसलिए आता है क्योंकि हिंदू पंचांग की गणना सूर्य और चंद्रमा दोनों की गति के आधार पर की जाती है। सौर वर्ष करीब 365 दिनों का होता है, जबकि चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों में पूरा हो जाता है। ऐसे में दोनों के बीच हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर पैदा हो जाता है। यही अंतर धीरे-धीरे बढ़ते हुए करीब तीन साल में एक पूरे महीने के बराबर हो जाता है। पंचांग और ऋतु चक्र के संतुलन को बनाए रखने के लिए इस अतिरिक्त समय को एक अलग महीने के रूप में जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस महीने में सूर्य किसी नई राशि में प्रवेश नहीं करता, इसलिए इसे पहले मलमास कहा जाता था। बाद में भगवान विष्णु ने इसे अपना प्रिय और पवित्र महीना घोषित किया, जिसके बाद इसका नाम पुरुषोत्तम मास पड़ गया। तभी से इस महीने को पूजा-पाठ, जप, तप और दान के लिए बेहद शुभ माना जाता है।
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भूलकर भी न करें ये काम - फोटो : Adobe Stock
भूलकर भी न करें ये काम 
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास को भक्ति, संयम और आत्मचिंतन का महीना माना जाता है। यही कारण है कि इस दौरान ऐसे कार्यों से दूर रहने की सलाह दी जाती है, जो भौतिक सुख-सुविधाओं या सांसारिक दिखावे से जुड़े हों। शास्त्रों में बताया गया है कि इस पूरे महीने व्यक्ति को अपने व्यवहार, खानपान और दिनचर्या में विशेष सावधानी रखनी चाहिए।
  • अधिक मास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ संस्कार और तिलक जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। मान्यता है कि इस समय किए गए शुभ कार्य अपेक्षित फल नहीं दे पाते, इसलिए इन्हें टालना बेहतर माना जाता है। इसके अलावा नया कारोबार शुरू करना, नई संपत्ति या वाहन खरीदना भी इस अवधि में शुभ नहीं माना गया है।
  • खानपान को लेकर भी इस महीने खास नियम बताए गए हैं। लहसुन, प्याज, मांसाहार, शराब और अन्य नशीली चीजों से दूरी बनाकर सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है। धार्मिक दृष्टि से यह समय मन और शरीर दोनों को शुद्ध रखने का माना गया है।
  • शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि अधिक मास के दौरान क्रोध, झूठ, चुगली, विवाद और किसी का अपमान करने जैसी आदतों से बचना चाहिए। इस महीने में अच्छे विचार, शांत व्यवहार और भगवान के नाम का स्मरण व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक लाभ प्रदान करता है।
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अधिक मास में क्या करें - फोटो : Adobe Stock
अधिक मास में क्या करें 
  • अधिक मास में पूजा-पाठ और दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पूरे महीने नियमित रूप से दीपदान करना बेहद शुभ माना जाता है। शाम के समय घर के मुख्य द्वार, तुलसी के पौधे और मंदिर में दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
  • इस पवित्र महीने में भगवान विष्णु की उपासना को सबसे फलदायी माना गया है। प्रतिदिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। साथ ही विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता या धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
  • दान का भी अधिक मास में विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दौरान जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने से जीवन के कई कष्ट दूर होते हैं। शास्त्रों में कांसे के पात्र में मालपुए रखकर दान करने की परंपरा का भी उल्लेख मिलता है, जिसे बेहद शुभ माना गया है।
  • अधिक मास के दौरान सात्विक और संयमित जीवन जीने पर भी जोर दिया गया है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करना, मन को शांत रखना, ईश्वर का ध्यान करना और ब्रह्मचर्य का पालन करना व्यक्ति को मानसिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने किए गए अच्छे कर्म कई गुना अधिक फल प्रदान करते हैं।

 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।   
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