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चाणक्य नीति: ऐसे धन को कभी नहीं लगाना चाहिए हाथ, होता है पाप के समान

Mon, 22 Feb 2021 07:38 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
आचार्य चाणक्य की गिनती आज भी श्रेष्ठ श्रेणी के विद्वानों में की जाती है। वर्षों पूर्व उनके द्वारा लिखी गई नीतियां आज के जीवन में भी व्यक्ति के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। उन्होंने अपने जीवन में अच्छी और बुरी दोनों तरह की परिस्थितियों का सामना किया परंतु फिर भी कभी हार नहीं मानी और न ही अपने आदर्शों के साथ समझौता किया। आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में अपने ज्ञान और अनुभव के आधार पर मनुष्य के जीवन से जुड़ी हुई महत्पूर्ण नीतियां बताई हैं। आचार्य चाणक्य के अनुसार धन आवश्यक होता है लेकिन कुछ परिस्थितियों में धन लेना पाप के समान होता है। तो चलिए जानते हैं इस बारें में....
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
जिस धन के लिए सहनी पड़े यातनाएं
आचार्य चाणक्य के अनुसार मनुष्य को कभी ऐसे धन को कभी हाथ नहीं लगाना चाहिए, जिसके कारण आपको कठोर यातना सहनी पड़े। ऐसा धन लेने से न केवल आपको शारीरिक यातना सहनी पड़ती है बल्कि मान-सम्मान की हानि का सामना भी करना पड़ सकता है। बेहतर रहता है कि ऐसे धन का त्याग कर देना चाहिए।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
धन के लिए न करें सदाचार का त्याग
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि केवल मेहनत के द्वारा कमाया गया धन ही व्यक्ति के लिए कल्याणकारी होता है। आचार्य चाणक्य के अनुसार ऐसा धन कभी नहीं लेना चाहिए जिसमें आपको सदाचार का त्याग करना पड़े। नीति शास्त्र के अनुसार धन के लिए कभी धर्म का त्याग नहीं करना चाहिए। अधर्म से कमाया गया धन पाप के समान होता है।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
शत्रु की चापलूसी से अर्जित धन पाप का समान
आचार्य चाणक्य ने कभी भी अपने मूल्यों से समझौता नहीं किया फिर भी अपने शत्रु को पराजित किया। चाणक्य अपने नीतिशास्त्र में कहते हैं कि जिस धन के लिए आपको अपने शत्रु की चापलूसी करनी पड़े, ऐसे धन का त्याग करना ही उचित रहता है। शत्रु की चापलूसी से कमाया गया धन सदैव आपके मान-सम्मान की क्षति करता है।
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