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शिव पुराणः कहां से आया शिवजी के पास डमरू? जानें बाकी चीजों का भी रहस्य

Thu, 13 Jul 2017 01:26 PM IST
amarujala.com- presented by: विनोद शुक्ला
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इस समय सावन का पवित्र महीना चल रहा है। भोलेनाथ को यह सावन का महीना बहुत प्रिय होता है। ऐसे में आज हम आपको भगवान शिव के एक हाथ में त्रिशूल, दूसरे हाथ में डमरू, गले में सांप और सिर पर चंद्रमा के बारें में बताने जा रहे है कि क्यों भगवान इसे धारण करते है और क्या है इसके पीछे का रहस्य।
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भगवान शिव को सभी प्रकार के अस्त्रों के चलाने में महारथ हासिल है लेकिन पौराणिक कथाओं में भगवान शिव को दो प्रमुख माना गया है एक है धनुष और दूसरा त्रिशुल। माना जाता है कि सृष्टि से आरंभ में ब्रह्रानाद से जब शिव प्रगट हुए तो उनके साथ रज, तम और सत गुण भी प्रगट हुए। यही तीनों गुण शिवजी के तीन शूल यानी त्रिशूल बना।
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सृष्टि के आरंभ में जब सरस्वती उत्पन्न हुई तो वीणा के स्वर से सृष्टि में ध्वनि को जन्म दिया, लेकिन यह सुर और संगीत विहीन थी।उस समय भगवान श‌िव ने नृत्य करते हुए चौदह बार डमरू बजाए और इस ध्वन‌ि से व्याकरण और संगीत के धन्द, ताल का जन्म हुआ। इस प्रकार शिव के डमरू की उत्पत्ति हुई।

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शिव मंदिर
शिवजी के गले में लिपटे नाग के बारे में पुराणों में बताया गया कि यह नागों के राजा नाग वासुकी है। वासुकी नाग भगवान शिव के परम भक्त थे इसलिए भगवान शिव ने गले में आभूषण की तरफ से हमेशा लिपटे रहने का वरदान दिया।
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राजा दक्ष के द्वारा मिले श्राप से बचने के लिए चन्द्रमा ने भगवान शिव की घोर तपस्या की। चन्द्रमा की तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ने उनके जीवन की रक्षा की और उन्हें अपने शीश पर धारण किया।
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