रामायण की इन 10 महिलाओं के बिना इसका स्वरूप कुछ और ही होता। इन महिलाओं ने न सिर्फ रामायण को एक मूल रूप दिया बल्कि इसकी अहमियत को भी कई गुणा बढ़ा दिया। आगे की तस्वीरों में देखें कैसे और किन मिहलाओं ने बदल दी रामायण की गाथा
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सीता
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सीता
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श्रीराम की पत्नी सीता। राम रावण युद्ध में सीता मुख्य कारण रही और वही सीता राम द्वारा परित्यक्त किए जाने पर धरती में समा गई।
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अहिल्या
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अहिल्या
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राम ने अहिल्या का उद्धार किया ये सब जानते हैं लेकिन अहिल्या समाज में औरतों की स्थिति का सटीक वर्णन करती है। यह बताती हैं स्त्री की समाज में क्या दश्ाा थी वह किस प्रकार पतिव्रत के लिए बाध्य थ्ाी।
ताड़का
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ताड़का
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राक्षसी ताड़का का वध राम के हाथों हुआ। ताड़का ने राम को युद्ध नीति में पारंगत किया और असत्य पर सत्य की जीत का पहला युद्ध राम ने ताड़का के साथ ही लड़ा।
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कैकयी
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कैकयी
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महत्वाकांक्षी कैकेयी न होती तो शायद रामायण का स्वरूप कुछ और ही होता। एक महिला की महत्वाकांक्षा क्या क्या करवा सकती है, कैकेयी उसका उदाहरण रही।
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मंथरा
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मंथरा
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मंथरा ने कैकेयी के कान भरे, मंथरा यूं तो रामायण की खलनायिका है लेकिन अगर दूसरे नजरिए से देखा जाए मंथरा के भड़काने पर ही राम वनवास गए, सीता हरण के हालात बने और राम रावण युद्ध हुआ।
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कौशल्या
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कौशल्या
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कौशल्या ने राजा दशरथ की आज्ञाकारी पत्नी होने का हर कर्तव्य निभाया। राम जैसे मर्यादा पुरुष को जन्म देकर कौशल्या हमेशा के लिए समाज की नजरों में कायम रहेगी।
सूर्पनखा
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सुर्पनखा
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देखा जाए तो सूर्पनखा का किरदार रामायण में बहुत ज्यादा अहम है। सूर्पनखा की कामुकता के कारण लक्ष्मण काो इसका नाक काटना पड़ा और यहीं से राम और रावण के बीच दुश्मनी श्ाुरु हुई। इसी घटना के कारण सीता का हरण हुअा।
मंदोदरी
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मंदोदरी
मंदोदरी कौशल्या की तरह सदैव पति की अनुगामिनी रही। हालांकि वो जानती थी रावण ये युद्ध हार जाएगा लेकिन वो मूक विवश सब देखती रही। कारण यह था कि पुरुष महत्वाकांक्षा के सामने स्त्री मजबूर थी।
शबरी
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शबरी
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शबरी ने मीठे और खट्टे फलों को चखकर श्रीराम को भेंट किया। एक कमजोर वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाली शबरी ने लक्ष्मण के जरिए समाज को एक बड़ा संदेश दिया।
रामायण में बाली की पत्नी तारा का भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। बाली के मारे जाने के बाद तारा ने अंगद को सुग्रीव का मंत्री बनने और श्रीराम के यु्द्ध में उनका साथ देने का आदेश दिया था।