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रक्षाबंधन 2026: एक से ज्यादा भाई हों तो किसे पहले बांधें राखी? जानें सही नियम

Thu, 27 Aug 2026 12:14 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Rakhi Badhne Ka Sahi Niyam: जब परिवार में एक से अधिक भाई हों, तो अक्सर यह सवाल उठता है कि राखी बांधने की शुरुआत किस भाई से की जाए, बड़े से या छोटे से? क्या उम्र के अनुसार क्रम तय होता है या बैठने की जगह के आधार पर? आइए जानते हैं इससे जुड़ी मान्यताएं।
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रक्षा बंधन 2026 - फोटो : AI
Raksha Bandhan 2026 Rakhi Rituals Rules: रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के भाव से जुड़ा प्रमुख पर्व है। वर्ष 2026 में रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके सुख, स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करती हैं। हालांकि, जब परिवार में एक से अधिक भाई हों, तो अक्सर यह सवाल उठता है कि राखी बांधने की शुरुआत किस भाई से की जाए, बड़े से या छोटे से? क्या उम्र के अनुसार क्रम तय होता है या बैठने की जगह के आधार पर? आइए जानते हैं इससे जुड़ी मान्यताएं।
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सबसे पहले किस भाई को राखी बांधें? - फोटो : AI
सबसे पहले किस भाई को राखी बांधें?
यदि परिवार में दो या उससे अधिक भाई हैं, तो सामान्य पारिवारिक परंपरा में बड़े भाई से राखी बांधने की शुरुआत करना उचित माना जाता है। इसके बाद छोटे भाइयों को राखी बांधी जा सकती है। हालांकि, राखी बांधने के लिए भाइयों के बैठने का क्रम कोई अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं है। भाई जहां बैठा हो, उसी आधार पर राखी बांधना जरूरी नहीं माना जाता।

रक्षाबंधन का मुख्य उद्देश्य भाई-बहन के बीच प्रेम, सम्मान और एक-दूसरे की मंगलकामना करना है। इसलिए राखी बांधते समय भाव और श्रद्धा को अधिक महत्व दिया जाता है।
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भाइयों से पहले किसे राखी बांधना शुभ माना जाता है? - फोटो : adobe stock
भाइयों से पहले किसे राखी बांधना शुभ माना जाता है?
भगवान गणेश: किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश पूजन से करने की परंपरा है। ऐसे में राखी बांधने से पहले गणेश जी को रक्षा सूत्र अर्पित किया जा सकता है। मान्यता है कि इससे कार्य में आने वाले विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना की जाती है।

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी: रक्षाबंधन सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है और इस अवसर पर भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु भगवान को रक्षा सूत्र अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना कर सकते हैं।

इष्टदेव या कुलदेवता: जिन परिवारों में कुलदेवता या इष्टदेव की पूजा की जाती है, वहां उन्हें भी रक्षा सूत्र अर्पित करने की परंपरा है। कई घरों में पहले देवता के चरणों में राखी रखकर पूजा की जाती है और फिर परिवार के सदस्यों को राखी बांधी जाती है।

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घर की वस्तुओं और पालतू जानवरों को राखी क्यों बांधते हैं? - फोटो : Freepik
घर की वस्तुओं और पालतू जानवरों को राखी क्यों बांधते हैं?
रक्षाबंधन पर राखी केवल भाई की कलाई तक सीमित नहीं रहती। कुछ परिवारों में नए वाहन, घर में लाई गई नई वस्तुओं और पालतू पशुओं को भी रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा है। इसे सुरक्षा, शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता है। वाहन या नई वस्तु को राखी बांधते समय उसके सुरक्षित रहने की कामना की जाती है। वहीं पालतू पशुओं के लिए अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुरक्षा की प्रार्थना की जाती है।
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रक्षाबंधन पर राखी बांधने का सही क्रम - फोटो : adobe stock
रक्षाबंधन पर राखी बांधने का सही क्रम
परिवार में कई भाई होने पर बड़े भाई से शुरुआत करना सामान्य और सम्मानजनक पारिवारिक परंपरा मानी जाती है। इसके बाद छोटे भाइयों को राखी बांधी जा सकती है। हालांकि, शास्त्रीय रूप से भाइयों के बैठने की जगह या क्रम को लेकर कोई अनिवार्य नियम नहीं माना जाता। इसलिए रक्षाबंधन पर राखी बांधते समय सबसे जरूरी है कि विधि के साथ श्रद्धा और भाई-बहन के प्रेम का भाव बना रहे।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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