फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kanwar Yatra 2026: कांवड़ यात्रा में क्या करें, क्या न करें? जानें जलाभिषेक का पूरा नियम

Sun, 02 Aug 2026 01:17 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

kanwar yatra 2026: धार्मिक ग्रंथों में कांवड़ यात्रा से जुड़े कई नियम और परंपराएं बताई गई हैं, जिनका पालन करना अत्यंत आवश्यक माना गया है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
विज्ञापन
1 of 5
Kanwar Yatra 2026 - फोटो : AI
Kanwar Yatra 2026: सावन का महीना आते ही देशभर में भक्ति और आस्था का अनोखा माहौल देखने को मिलता है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, गौमुख और सुल्तानगंज जैसे पवित्र स्थानों से गंगाजल लेकर लंबी पैदल यात्रा पर निकलते हैं, जिसे कांवड़ यात्रा कहा जाता है। यह यात्रा केवल जल लाकर भगवान शिव पर चढ़ाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें अनुशासन, संयम और सच्ची श्रद्धा की परीक्षा भी शामिल होती है। धार्मिक ग्रंथों में कांवड़ यात्रा से जुड़े कई नियम और परंपराएं बताई गई हैं, जिनका पालन करना अत्यंत आवश्यक माना गया है।

 
विज्ञापन

2 of 5
कांवड़ का जल किसे चढ़ाया जाता है? - फोटो : adobe stock
कांवड़ का जल किसे चढ़ाया जाता है?
कांवड़ यात्रा का मुख्य उद्देश्य भगवान शिव का जलाभिषेक करना होता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के समय निकले विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था, जिससे उनके शरीर में तीव्र जलन उत्पन्न हुई। उस समय देवताओं ने पवित्र नदियों का जल अर्पित कर उन्हें शीतलता प्रदान की। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज भी शिवभक्त सावन में गंगाजल लाकर शिवलिंग पर अर्पित करते हैं।
 
विज्ञापन

3 of 5
जलाभिषेक करने की सही विधि - फोटो : adobe stock
जलाभिषेक करने की सही विधि
शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय विधि-विधान का ध्यान रखना जरूरी होता है। सबसे पहले स्वयं को शारीरिक और मानसिक रूप से शुद्ध करें। मंदिर में प्रवेश करने से पहले हाथ-पैर धोकर मन को शांत करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते रहें। जलाभिषेक के दौरान उत्तर दिशा की ओर मुख करना शुभ माना जाता है, क्योंकि इसे भगवान शिव का निवास स्थान माना गया है।

4 of 5
जलाभिषेक करने की सही विधि - फोटो : adobe stock
जल अर्पित करने की प्रक्रिया भी एक क्रम में की जाती है। सबसे पहले जल की कुछ बूंदें जलाधारी के दाहिने और बाएं भाग में अर्पित करें, जो गणेश जी और कार्तिकेय जी को समर्पित मानी जाती हैं। इसके बाद मध्य भाग में थोड़ा जल अर्पित करें और अंत में शिवलिंग पर धीरे-धीरे गंगाजल की धारा चढ़ाएं। अभिषेक के बाद शिवलिंग की आधी परिक्रमा की जाती है और जलाधारी को लांघना वर्जित होता है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
कांवड़ यात्रा के दौरान इन नियमों का रखें विशेष ध्यान - फोटो : AI
इन नियमों का रखें विशेष ध्यान
कांवड़ यात्रा के दौरान नियमों का पालन बहुत जरूरी होता है, क्योंकि छोटी-सी गलती भी यात्रा को अधूरा बना सकती है। कांवड़ को कभी जमीन पर नहीं रखा जाता। विश्राम के समय इसे किसी ऊंचे स्थान या स्टैंड पर टांगना चाहिए। यदि कांवड़ जमीन से छू जाए, तो जल अशुद्ध माना जाता है।

इसके अलावा यात्रा के दौरान चमड़े से बनी वस्तुओं का उपयोग नहीं किया जाता। सात्विक भोजन करना और नशे से दूर रहना भी अनिवार्य होता है। शौच या विश्राम के बाद बिना स्नान किए कांवड़ को स्पर्श नहीं करना चाहिए।

Navgrah Dosh Upay: कुंडली के ग्रह दोष कर रहे हैं परेशान? सावन में इन खास अभिषेक से दूर होगी नवग्रह पीड़ा

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें