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Yogini Ekadashi 2025: योगिनी एकादशी पर विष्णु जी को लगाएं इन दो चीजों का भोग, दूर होंगी सभी समस्याएं

Wed, 18 Jun 2025 05:27 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Yogini Ekadashi 2025: पंचांग के मुताबिक योगिनी एकादशी पर अश्विनी नक्षत्र बन रहा है, जो शाम 7 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। इस दिन अतिगण्ड योग भी बना हुआ है
 
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Yogini Ekadashi 2025 - फोटो : adobe
Yogini Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से साधक को मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती हैं। यह व्रत प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि पर रखा जाता है। इस दौरान एकादशी तिथि को नाम माह के अनुसार दिया जाता है। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को योगिनी एकादशी व्रत कहा जाता है। इस साल 21 जून 2025 को योगिनी एकादशी है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोज कराने के बराबर पुण्य फल मिलता है। यही नहीं व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को आर्थिक लाभ भी होता है। हालांकि एकादशी पर विष्णु जी को इन दो चीजों का भोग लगाने पर वह प्रसन्न होते हैं। आइए इनके बारे में जानते हैं।
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Yogini Ekadashi 2025 - फोटो : freepik
योगिनी एकादशी तिथि 
आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 21 जून 2025 को सुबह 07 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी। इसका समापन 22 जून को सुबह 04 बजकर 27 मिनट पर है। ऐसे में 21 जून 2025 को योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

योगिनी एकादशी शुभ योग
पंचांग के मुताबिक योगिनी एकादशी पर अश्विनी नक्षत्र बन रहा है, जो शाम 7 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। इस दिन अतिगण्ड योग भी बना हुआ है, जो रात 8:28 मिनट तक है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:59-12:47 तक रहेगा। अमृतकाल दोपहर 1:12-2:40 तक रहेगा।
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Yogini Ekadashi 2025 - फोटो : instagram
मखाने की खीर
योगिनी एकादशी पर भगवान विष्णु को मखाने की खीर का भोग लगाएं। मान्यता है कि इस भोग से प्रभु प्रसन्न होते हैं और साधक पर अपनी कृपा बरसाते हैं।

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Yogini Ekadashi 2025 - फोटो : इंस्टाग्राम
पंचामृत 
एकादशी पर आप विष्णु जी को पंचामृत जिसे दूध, दही, शहद, चीनी और घी के मिश्रण से तैयार किया जाता है। इसका भोग लगाएं। इससे जीवन में शांति और तनाव से मुक्ति मिलती हैं।
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Yogini Ekadashi 2025 - फोटो : Adobe Stock
भगवान विष्णु की आरती

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

 जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥
 
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥
 
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥
 
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥
 
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
 
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥
 
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥
 
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥
 
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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