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महिलाएं क्यों रखती हैं करवा चौथ का व्रत, जानिए सबसे पहले किसने रखा था ये व्रत

Sat, 07 Oct 2017 03:07 PM IST
amarujala.com- Presented by: विनोद शुक्ला
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कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं बिना जल के दिनभर उपवास पर रहती है और शाम को चांद के देखने के बाद अपने पति के हाथों से पानी पी कर व्रत खोलती हैं। करवा चौथ का व्रत सदियों से चला आ रहा है। शास्त्रों में इसके पीछे कई कहानियां प्रचलित है।

पढ़ें- करवा चौथ 2017: इस समय होगा चांद का दीदार और ये है पूजा का शुभ मुहूर्त
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मान्यता के अनुसार, जब पांडव नील गिरि के जंगल में तपस्या कर रहे थे तब द्रौपदी उनके लिए काफी परेशान होने लगी थी। द्रौपदी ने भगवान कृष्ण से अपना दुख बताया और उनकी परेशानियों से रक्षा करने के लिए उपाय पूछा। भगवान श्रीकृष्ण ने द्रोपदी को करवा चौथ का व्रत रखने की सलाह दी ।जिसके बाद पांडवों की सकुशल वापसी संभव हो पायी।
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इसके आलावा एक अन्य कथा प्रचलित है जिसके अनुसार सावित्री ने यमराज से अपने पति के प्राणों की भीख मांगी थी कि उसके सुहाग को वह न ले जाएं। तभी से महिलाएं इस व्रत का पालन करती हैं।

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मान्यताओं के अनुसार, सबसे पहले माता पार्वती ने यह व्रत शिवजी के लिए रखा था। इसके बाद ही उन्हें अखंड सौभाग्य प्राप्त किया था। इसलिए इस व्रत में भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा की जाती है। 
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वहीं करवा चौथ के दिन चंद्रमा की पूजा करने के बारे में लंका कांड में एक कथा है जब भगवान राम समु्द्र पार करके लंका पहुंचे तो उन्होने चांद पर पड़ने वाली छाया के बारे में बताया कि विष और चंद्रमा दोनों ही समुद्र मंथन से निकले थे जिस कारण से चंद्रमा विष को अपना भाई मानते है इस कारण से विष को अपने ह्रदय में स्थान दे रखा है। इसी कारण से करवा चौथ के दिन महिलाएं चांद की पूजा करती हैं और पति से दूर न रहने की कामना करती हैं।
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