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Shami Puja on Vijayadashami: विजयादशमी पर शमी पूजन क्यों करते हैं? जानें इसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

Sun, 28 Sep 2025 12:57 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Shami tree in Ramayana and Mahabharata: विजयादशमी पर शमी वृक्ष का पूजन न केवल धार्मिक और पौराणिक महत्व रखता है, बल्कि इसे समृद्धि, शांति और सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है। यह परंपरा परिवार में सद्भाव, सकारात्मक ऊर्जा और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा लाने का माध्यम है। शमी वृक्ष का पूजन हमें प्रकृति और आस्था से जोड़कर जीवन में खुशहाली और संतुलन का अनुभव कराता है।
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विजयदशमी पर शमी का महत्व - फोटो : amar ujala
Vijayadashmi Shami Puja: हिंदू परंपरा में पेड़ों का पूजन सदियों से एक महत्वपूर्ण धार्मिक और आध्यात्मिक अभ्यास रहा है। नवरात्रि और विशेषकर विजयादशमी के अवसर पर शमी वृक्ष का पूजन करने की परंपरा भी इसी धार्मिक महत्व से जुड़ी है। शमी का पेड़ केवल एक प्राकृतिक वस्तु नहीं है, बल्कि इसे समृद्धि, शांति और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस वृक्ष से जुड़े कई चमत्कारिक और शुभ अनुभवों का उल्लेख मिलता है। शमी वृक्ष का पूजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान के रूप में होता है, बल्कि इसे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और खुशहाली लाने वाला उपाय भी माना जाता है।
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इसके अलावा, शमी वृक्ष को शनि ग्रह से भी जोड़कर देखा जाता है, जो जीवन में संतुलन और कर्म के महत्व को दर्शाता है। हिंदू परंपरा में यह मान्यता है कि घर के द्वार पर शमी का पेड़ लगाने से न केवल परिवार में शांति और सद्भावना आती है, बल्कि विपदाओं और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा भी मिलती है। यही कारण है कि विजयादशमी के दिन शमी के वृक्ष का पूजन और उसकी पत्तियों का आदर करना शुभ माना जाता है। यह अभ्यास हमें प्रकृति और आस्था दोनों से जोड़ता है, और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करता है।
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शमी के वृक्ष का पूजन करने से जीवन में आने वाली कठिनाइयों और संघर्षों में अनुकूलता आती है। - फोटो : Amar Ujala
विजयादशमी और शमी का महत्व
विजयादशमी का पर्व शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों के समापन पर मनाया जाता है और इसे असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक माना जाता है। इसी दिन रावण दहन के साथ शस्त्र पूजन की प्रथा भी निभाई जाती है और विशेष रूप से शमी के पेड़ की पूजा का महत्व है। शमी में शनि ग्रह का वास माना जाता है और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार जब शनि प्रतिकूल होता है, तो शमी के वृक्ष का पूजन करने से जीवन में आने वाली कठिनाइयों और संघर्षों में अनुकूलता आती है। शनि कर्म के अनुसार फल देते हैं और प्रतिदिन शमी के वृक्ष का पूजन करने से उनके प्रभाव से होने वाले दोषों से मुक्ति मिलती है।
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भगवान श्रीराम ने लंका पर आक्रमण से पहले शमी के वृक्ष की पूजा कर विजय प्राप्त करने की प्रार्थना की थी। - फोटो : adobe stock
पौराणिक कथाओं में शमी वृक्ष
स्कंद पुराण और महाभारत में वर्णन मिलता है कि भगवान श्रीराम ने लंका पर आक्रमण से पहले शमी के वृक्ष की पूजा कर विजय प्राप्त करने की प्रार्थना की थी। विजय प्राप्ति के बाद उन्होंने अयोध्या में शमी की पत्तियों का दान देकर लोगों में खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक स्थापित किया।
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महाभारत काल में पांडवों ने वनवास के दौरान अपने अस्त्र-शस्त्र शमी के वृक्ष में सुरक्षित रखे थे - फोटो : freepik.com
महाभारत काल और पांडवों का संबंध
महाभारत काल में पांडवों ने वनवास के दौरान अपने अस्त्र-शस्त्र शमी के वृक्ष में सुरक्षित रखे थे और पुनः प्राप्त कर युद्ध में विजयी हुए। इस प्रकार शमी का पेड़ केवल एक पौधा नहीं, बल्कि शौर्य, शांति और पौराणिक कथाओं का प्रतीक बन गया है, जो भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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