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Maha Navami 2025: 1 अक्तूबर को महानवमी, जानें कन्या पूजन का समय और इससे जुड़े नियम

Sun, 28 Sep 2025 12:08 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Maha Navami 2025: शारदीय नवरात्रि समाप्ति की ओर है। यह पावन पर्व महानवमी के दिन कन्या पूजन के साथ संपन्न होगा और इसके अगले दिन पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ विजयदशमी मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथियों पर कन्या पूजन का विशेष महत्व है। 
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Maha Navami 2025 - फोटो : अमर उजाला
Maha Navami 2025: शारदीय नवरात्रि समाप्ति की ओर है। यह पावन पर्व महानवमी के दिन कन्या पूजन के साथ संपन्न होगा और इसके अगले दिन पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ विजयदशमी मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथियों पर कन्या पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन घरों में कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर पूजा जाता है और उनके लिए भोज का आयोजन किया जाता है। इससे मां दुर्गा के साथ-साथ सभी देवी-देवताओं की कृपा भी जीवन पर बनी रहती है। यही नहीं कन्या पूजन के प्रभाव से घर-परिवार में समृद्धि, सुख-शांति और सौभाग्य का वास भी होता है। इस वर्ष महानवमी 1 अक्तूबर 2025 को मनाई जाएगी। इस दिन देशभर के देवी मंदिरों में भव्य अनुष्ठान, कन्या पूजन और महाआरती का आयोजन किया जाता है। ऐसे में इस दिन के महत्व और कन्या पूजन के समय को विस्तार से जानते हैं।
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Maha Navami 2025 - फोटो : freepik
कन्या पूजन शुभ मुहूर्त
  • नवमी तिथि पर कन्या पूजन सुबह 4 बजकर 53 मिनट से 5 बजकर 41 मिनट तक कर सकते हैं। 
  • सुबह 8 बजकर 6 मिनट से 9 बजकर 50 मिनट के बीच आप कन्या भोज कर सकते हैं।
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Maha Navami 2025 - फोटो : Adobe stock
नवमी तिथि 2025
इस साल 30 सितंबर 2025 को शाम 6 बजकर 6 मिनट से नवमी तिथि की शुरुआत होगी। इसका समापन 1 अक्तूबर को शाम में 7 बजकर 2 मिनट पर होगा। ऐसे में महानवमी 1 अक्तूबर 2025 को मान्य होगी।
 

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Maha Navami 2025 - फोटो : adobe stock
शुभ संयोग
महानवमी पर पूर्वाषाढा नक्षत्र बन रहा है, जो सुबह 8 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। इसके बाद उत्तराषाढा नक्षत्र का संयोग बनेगा। हालांकि, इस तिथि पर अतिगण्ड योग रहेगा। ज्योतिष दृष्टि से भी यह तिथि खास है। इस दिन सूर्य और बुध के कन्या राशि में होने से बुधादित्य योग बन रहा है। 
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Maha Navami 2025 - फोटो : adobe stock
कन्या पूजन के नियम
  • मान्यता है कि कन्या पूजन में 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को शामिल करना चाहिए।
  • माना जाता है कि कन्या भोज से पहले उनके चरण धोकर उनका आदर करना चाहिए। इससे देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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Maha Navami 2025 - फोटो : freepik
  • धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक कन्या पूजन में हमेशा 9 कन्याएं बैठानी चाहिए। हालांकि, आप इससे अधिक और  3, 5 या 7 कन्याओं को भी भोजन करा सकती हैं।
  • कन्या पूजन में एक लड़के को भी अवश्य भोजन करना चाहिए, जिसे बटुक भैरव भी कहा जाता है। मान्यता है कि यह बहुत शुभ होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है।
  • कन्या पूजन में आप हलवा, पूरी, काले चने को अवश्य शामिल करें और अंत में उन्हें कुछ उपहार या रूपये देकर आशीर्वाद लें।



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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): 
यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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