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Varuthini Ekadashi 2025: किस दिन रखा जाएगा वरुथिनी एकादशी व्रत ? यहां जानिए तिथि और पूजा विधि

Tue, 15 Apr 2025 05:59 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Varuthini Ekadashi 2025 Date: 13 अप्रैल 2025 से वैशाख माह की शुरुआत हो चुकी है, जो हिंदू नववर्ष का दूसरा महीना है। इस माह को मुख्य रूप से भगवान विष्णु और परशुराम जी की उपासना के लिए जाना जाता है। 
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Varuthini Ekadashi 2025 - फोटो : adobe
Varuthini Ekadashi 2025 Date: 13 अप्रैल 2025 से वैशाख माह की शुरुआत हो चुकी है, जो हिंदू नववर्ष का दूसरा महीना है। इस माह को मुख्य रूप से भगवान विष्णु और परशुराम जी की उपासना के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि वैशाख माह में पूजा-पाठ व उपवास रखने से जीवन में सुख-समृद्धि व खुशियों का वास होता है। इस दौरान वरुथिनी एकादशी का व्रत भी वैशाख माह में रखा जाता है, जो सृष्टि के संचालक भगवान विष्णु को समर्पित है। बता दें, एकादशी तिथि पर प्रभु की उपासना-उपवास रखने से साधक के बड़े से बड़े दुख का निवारण व पाप से मुक्ति प्राप्त होती है। ऐसे में यह व्रत साल 2025 में किस दिन रखा जाएगा, आइए जान लेते हैं.....
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Varuthini Ekadashi 2025 - फोटो : adobe stock
कब है वरुथिनी एकादशी 
इस साल वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 23 अप्रैल 2025 को शाम 4 बजकर 43 मिनट पर होगी। इसका समापन 24 अप्रैल को दोपहर 2 बजकर 32 मिनट पर है। ऐसे में 24 अप्रैल 2025 को वरुथिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
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Varuthini Ekadashi 2025 - फोटो : adobe stock
व्रत पारण समय
पंचांग के मुताबिक वरुथिनी एकादशी व्रत का पारण 25 अप्रैल 2025 को किया जाएगा। इस दिन सुबह 5 बजकर 46 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 23 मिनट तक आप व्रत खोल सकते हैं।

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Varuthini Ekadashi 2025 - फोटो : adobe stock
शुभ योग
24 अप्रैल 2025 को वरुथिनी एकादशी के दिन शतभिषा नक्षत्र का योग बना रहेगा, जो सुबह 10 बजकर 49 मिनट तक है। इस दौरान ब्रह्म योग का संयोग भी बन रहा है, जो दोपहर 3 बजकर 55 मिनट तक है। इसके बाद ऐन्द्र योग बनेगा।
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Varuthini Ekadashi 2025 - फोटो : freepik
वरुथिनी एकादशी पूजा विधि
  • वरुथिनी एकादशी के दिन सुबह ही स्नान करें और साफ वस्त्रों को धारण करें।
  • इसके बाद घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
  • फिर एक चौकी लें और उसपर भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित कर दें।
  • अब प्रभु को फूल और कुछ मिठाई अर्पित करें।
  • इसके बाद शुद्ध देसी घी से दीप जला लें।
  • विष्णु जी को पीले फल चढ़ाएं।
  • जीवन में समृद्धि और सौभाग्य की प्रार्थना करते हुए प्रभु के मंत्रों का जाप करें।
  • वरुथिनी एकादशी कथा का पाठ करें।
  • अंत में आरती करें और जरूरतमंदों को दान करें।
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Varuthini Ekadashi 2025 - फोटो : adobe stock
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

 

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