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Vaishakh Purnima 2026: कब है वैशाख पूर्णिमा ? जानें तिथि, महत्व और पूजा विधि

Wed, 15 Apr 2026 03:57 PM IST
Megha Kumari ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Vaishakh Purnima 2026: वैशाख पूर्णिमा के दिन स्नान-दान का विशेष महत्व होता है। खासकर जल से भरे घड़े, वस्त्र, फल, अन्न और छाया प्रदान करने वाली वस्तुओं का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। 
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वैशाख पूर्णिमा - फोटो : AI
Vaishakh Purnima 2026: वैशाख माह जारी है और इस महीने की पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। यह तिथि दान-पुण्य, स्नान और भगवान की उपासना के लिए बेहद शुभ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख पूर्णिमा पर किए गए शुभ कार्य कई गुना फल प्रदान करते हैं। इससे जीवन में सकारात्मक बदलाव, सुख-समृद्धि और कार्य विस्तार के मार्ग प्रशस्त होते हैं। अब सवाल यह है कि, इस बार वैशाख पूर्णिमा कब मनाई जाएगी ? ऐसे में आइए इसके बारे में जानते हैं।
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वैशाख पूर्णिमा - फोटो : Freepik
कब है वैशाख पूर्णिमा ? 
  • पंचांग के अनुसार, इस वर्ष वैशाख पूर्णिमा तिथि 30 अप्रैल 2026 को रात 9:12 बजे से प्रारंभ होगी।
  • इस तिथि का समापन 1 मई 2026 को रात 10:52 पर होगा।
  • उदया तिथि के अनुसार, इस बार वैशाख पूर्णिमा 1 मई 2026 को मनाई जाएगी।
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वैशाख पूर्णिमा - फोटो : adobe
स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:15 से 05:00 तक
  • सूर्योदय स्नान का श्रेष्ठ समय: 05:35 से 07:30  तक
 

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वैशाख पूर्णिमा - फोटो : adobe
पूजा विधि
  • वैशाख पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी या घर पर ही स्नान करें।
  • अब भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें और दोनों को फूलों की माला अर्पित करें।
  • इसके बाद सफेद और पीले रंग की मिठाई भोग के रूप में अर्पित करें।
  • इस दौरान दीप, धूप और तुलसी प्रभु और देवी को अर्पित करें। 
  • फिर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें।
  • शाम को चंद्रमा के दर्शन कर पूजा करें। 
  • चंद्रमा को अर्घ्य दें और सफेद चीजों का दान करें। इससे मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  • अंत में पूजा में हुई भूल की क्षमा मांगकर पूजा समाप्त करें।
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वैशाख पूर्णिमा - फोटो : Adobe Stock
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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