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Vaishakh Amavasya 2025: अश्विनी नक्षत्र में वैशाख अमावस्या, पूर्वजों का आशीर्वाद पाने के लिए करें ये काम

Fri, 25 Apr 2025 04:47 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पंचांग के मुताबिक इस बार 27 अप्रैल को वैशाख अमावस्या है। इस तिथि पर प्रीति योग बन रहा है, जिसपर अश्विनी नक्षत्र का संयोग बन रहा है। 
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पंचांग के मुताबिक इस बार 27 अप्रैल को वैशाख अमावस्या है। इस तिथि पर प्रीति योग बन रहा है, जिसपर अश्विनी नक्षत्र का संयोग बन रहा है। - फोटो : adobe
Vaishakh Amavasya 2025: हिंदू धर्म में वैशाख माह की उपासना का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस माह की सभी तिथियां बेहद शुभ है और इनमें पूजा-पाठ व दान करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। धार्मिक ग्रंथों में वैशाख को भगवान विष्णु की आराधना का महीना कहा जाता है और इस समय किए गए पुण्य कार्य कभी क्षय नहीं होते है। इस दौरान पड़ने वाली अमावस्या और भी कल्याणकारी है।

इस तिथि को विशेष रूप से पितरों की आत्मशांति के लिए पिंडदान व दान-पुण्य से जुड़े कार्य किए जाते हैं। इस दिन पवित्र नदी में स्नान से लेकर दोपहर के समय धूप-ध्यान किया जाता है। इसके प्रभाव से पितृदोष से मुक्ति प्राप्त होती हैं और वंशों पर पूर्वजों की कृपा भी बनी रहती हैं। पंचांग के मुताबिक इस बार 27 अप्रैल को वैशाख अमावस्या है। इस तिथि पर प्रीति योग बन रहा है, जिसपर अश्विनी नक्षत्र का संयोग है। इस योग में कुछ मंत्रों के जाप से पितरों की कृपा मिलती हैं और घर से सभी नकारात्मकताएं दूर होती हैं। आइए इनके बारे में जानते हैं।
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Vaishakh Amavasya 2025 - फोटो : adobe stock
वैशाख अमावस्या मुहूर्त 2025
  • ब्रह्म मुहूर्त: 27 अप्रैल, प्रात: 04:17 से प्रात:05:00 बजे तक
  • सर्वार्थ सिद्धि योग:27 अप्रैल, प्रात:05:44 से 28 अप्रैल देर रात्रि 12:38 तक
पितृ दोष निवारण मंत्र
  • “ॐ श्रीं सर्व पितृ दोष निवारणाय क्लेशं हं हं सुख शांतिम् देहि फट् स्वाहा”।
  • "ॐ पितृभ्य देवताभ्य महायोगिभ्येच च, नमः स्वाहा स्वाध्याय च नित्यमेव नमः"।
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Vaishakh Amavasya 2025 - फोटो : adobe stock
पितृ गायत्री मंत्र
  • ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात्।
  • ॐ देवताभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नम: स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नम:।
  • ॐ आद्य-भूताय विद्महे सर्व-सेव्याय धीमहि। शिव-शक्ति-स्वरूपेण पितृ-देव प्रचोदयात्।

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Vaishakh Amavasya 2025 - फोटो : adobe stock
पितृ दोष शांति मंत्र
ॐ पितृदेभ्यः स्वाहा ||

 
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Vaishakh Amavasya 2025 - फोटो : adobe
सम्पूर्ण पितृ तर्पण मंत्र
ॐ अकाशात् पतितं तर्पयामि, पृथिव्यां तर्पयामि, आकाशच देव्यां तर्पयामि।
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Vaishakh Amavasya 2025 - फोटो : freepik
पितृ सूक्तम् का पाठ
उदिताम् अवर उत्परास उन्मध्यमाः पितरः सोम्यासः।
असुम् यऽ ईयुर-वृका ॠतज्ञास्ते नो ऽवन्तु पितरो हवेषु॥

अंगिरसो नः पितरो नवग्वा अथर्वनो भृगवः सोम्यासः।
तेषां वयम् सुमतो यज्ञियानाम् अपि भद्रे सौमनसे स्याम्॥

ये नः पूर्वे पितरः सोम्यासो ऽनूहिरे सोमपीथं वसिष्ठाः।
तेभिर यमः सरराणो हवीष्य उशन्न उशद्भिः प्रतिकामम् अत्तु॥

त्वं सोम प्र चिकितो मनीषा त्वं रजिष्ठम् अनु नेषि पंथाम्।
तव प्रणीती पितरो न देवेषु रत्नम् अभजन्त धीराः॥

त्वया हि नः पितरः सोम पूर्वे कर्माणि चक्रुः पवमान धीराः।
वन्वन् अवातः परिधीन् ऽरपोर्णु वीरेभिः अश्वैः मघवा भवा नः॥

त्वं सोम पितृभिः संविदानो ऽनु द्यावा-पृथिवीऽ आ ततन्थ।
तस्मै तऽ इन्दो हविषा विधेम वयं स्याम पतयो रयीणाम्॥

बर्हिषदः पितरः ऊत्य-र्वागिमा वो हव्या चकृमा जुषध्वम्।
तऽ आगत अवसा शन्तमे नाथा नः शंयोर ऽरपो दधात॥

आहं पितृन्त् सुविदत्रान् ऽअवित्सि नपातं च विक्रमणं च विष्णोः।
बर्हिषदो ये स्वधया सुतस्य भजन्त पित्वः तऽ इहागमिष्ठाः॥

उपहूताः पितरः सोम्यासो बर्हिष्येषु निधिषु प्रियेषु।
तऽ आ गमन्तु तऽ इह श्रुवन्तु अधि ब्रुवन्तु ते ऽवन्तु-अस्मान्॥

आ यन्तु नः पितरः सोम्यासो ऽग्निष्वात्ताः पथिभि-र्देवयानैः।
अस्मिन् यज्ञे स्वधया मदन्तो ऽधि ब्रुवन्तु ते ऽवन्तु-अस्मान्॥

अग्निष्वात्ताः पितर एह गच्छत सदःसदः सदत सु-प्रणीतयः।
अत्ता हवींषि प्रयतानि बर्हिष्य-था रयिम् सर्व-वीरं दधातन॥

येऽ अग्निष्वात्ता येऽ अनग्निष्वात्ता मध्ये दिवः स्वधया मादयन्ते।
तेभ्यः स्वराड-सुनीतिम् एताम् यथा-वशं तन्वं कल्पयाति॥

अग्निष्वात्तान् ॠतुमतो हवामहे नाराशं-से सोमपीथं यऽ आशुः।
ते नो विप्रासः सुहवा भवन्तु वयं स्याम पतयो रयीणाम्॥

आच्या जानु दक्षिणतो निषद्य इमम् यज्ञम् अभि गृणीत विश्वे।
मा हिंसिष्ट पितरः केन चिन्नो यद्व आगः पुरूषता कराम॥

आसीनासोऽ अरूणीनाम् उपस्थे रयिम् धत्त दाशुषे मर्त्याय।
पुत्रेभ्यः पितरः तस्य वस्वः प्रयच्छत तऽ इह ऊर्जम् दधात॥

 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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