एक कथा प्रचलित है कि एक बार यमराज ने यमदूतों से कहा लोगों के प्राण हरते समय तुम्हें कभी दुःख हुआ है ? इस पर यमदूत ने कहा कि एक बार एक राजकुमार के प्राण हरते समय उनको बहुत दुःख हुआ था। राजकुमार की शादी के चार ही दिन हुए थे। राजकुमार की मृत्यु से राजमहल में हाहाकार मच गयी थी और नववधू का विलाप देखकर हमारा हृदय हमें धिक्कारने लगा। इसके बाद यमदूतों ने यमराज से पूछा कि हे मृत्यृ के देवता कोई ऐसा उपाय नहीं है जिससे किसी भी इंसान की अकाल मृत्यु न हो तो इस पर यमराज ने कहा कि जो व्यक्ति छोटी दीपावली के दिन मेरे नाम का दीप जलाकर मुझे याद करेगा उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं सताएगा । यह दिन नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इस दिन यम के लिए दीप जलाने वाले को नरक का भय भी नहीं रहता है।