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Somvati Amavasya: कुंडली में कमजोर चंद्रमा वालों के लिए खास मौका, सोमवती अमावस्या पर करें ये उपाय

Fri, 12 Jun 2026 02:15 PM IST
Jyoti Mehra ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी

सार

Somvati Amavasya 2026: 15 जून की सोमवती अमावस्या अधिक मास में पड़ रही है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस अमावस्या के दौरान पवित्र नदियों में स्नान करना, मंत्रोच्चार करना और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करने से स्थायी पुण्य प्राप्त होता है और जीवन में आनंद, शांति और सकारात्मकता का संचार होता है।
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क्यों खास है इस बार की सोमवती अमावस्या? - फोटो : Amar Ujala
Somvati Amavasya 2026 Date: सोमवती अमावस्या 15 जून सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन दुर्लभ सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग का महासंयोग रहेगा। हिंदू पंचांग में अमावस्या का समय धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब यह समय सोमवार को पड़ता है, तो इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है, जो एक अत्यंत शुभ दिन माना जाता है। 15 जून की सोमवती अमावस्या अधिक मास में पड़ रही है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित अनुष्ठान करने से वैवाहिक सुख, समृद्धि और सौभाग्य प्राप्त होता है।

इसके अलावा, तर्पण (पूर्वजों को जल अर्पित करना), श्राद्ध (पूर्वजों की पूजा) और दान-पुण्य करने से असाधारण आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं। इस अमावस्या के दौरान पवित्र नदियों में स्नान करना, मंत्रोच्चार करना और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करने से स्थायी पुण्य प्राप्त होता है और जीवन में आनंद, शांति और सकारात्मकता का संचार होता है।
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कब है सोमवती अमावस्या? - फोटो : adobe stock
कब है सोमवती अमावस्या?
अमावस्या तिथि का आरंभ 14 जून, रविवार को दिन में 12 बजकर 20 मिनट पर होगा और अगले दिन 15 जून, सोमवार को सुबह 8 बजकर 24 मिनट तक अमावस्या तिथि व्याप्त रहेगी। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर 15 जून सोमवार को सोमवती अमावस्या का व्रत रखा जाएगा और स्नान-दान किया जाएगा।

स्नान-दान का शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 04 मिनट से सुबह 4 बजकर 44 मिनट तक इसके बाद  स्नान-दान का मुहूर्त सुबह 5 बजकर 16 मिनट से दोपहर 12 बजकर 21मिनट तक रहेगा।
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क्यों खास है सोमवती अमावस्या? - फोटो : adobe stock
क्यों खास है सोमवती अमावस्या?
सोमवती अमावस्या के दिन सुहागिन महिलाएं व्रत रखती है और पति की लंबी उम्र के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती है। इस दिन पीपल के पेड़ की भी पूजा और परिक्रमा भी की जाती है। अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान करने और दान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है। इसके अलावा, अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण और श्राद्ध करने से पितृ दोष में शांत होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है।

जिनका जन्म अमावस्या पर हुआ है. जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर है, जिनके चंद्रमा 6वें, 8वें या 12वें भाव में हैं। ऐसे लोगों को इस दिन विशेष रूप से भगवान शिव-माता पार्वती पूजा और सफेद वस्तुओं का दान करना चाहिए. इससे मानसिक तनाव, अशांति और जीवन की परेशानियों में राहत मिलती है।
 

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मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उपाय - फोटो : adobe stock
मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उपाय
हिंदू मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ अधिक मास की अमावस्या वाले दिन मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए साधक को अपने घर की साफ-सफाई करने के बाद प्रत्येक कोने में प्रकाश की उचित व्यवस्था करनी चाहिए। 

अमावस्या वाले दिन मां लक्ष्मी को मनाने के लिए सायंकाल घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं और पूजा में लक्ष्मीअष्टकं अथवा श्रीसूक्त का पाठ विशेष रूप से करना चाहिए।
 
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मांगलिक कार्यों की शुरुआत - फोटो : Amar Ujala
मांगलिक कार्यों की शुरुआत
15 जून के बाद मांगलिक कार्यों पर लगा विराम समाप्त हो जाएगा। अधिक ज्येष्ठ माह की अमावस्या के साथ ही मलमास का समापन होगा और शुद्ध ज्येष्ठ मास की शुरुआत होगी। इसी के साथ मांगलिक कार्यों पर लगा विराम भी समाप्त हो जाएगा। 16 जून से शुद्ध ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष आरंभ होगा। 19 जून से विवाह सहित शुभ मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाएगी।

ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी

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