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Shukra Pradosh Vrat 2025: शुक्र प्रदोष व्रत पर इन मंत्रों का करें जाप, अकाल मृत्यु का भय होगा समाप्त

Thu, 24 Apr 2025 04:49 PM IST
मेघा कुमारी ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

इस बार वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 25 अप्रैल को सुबह 11: 44 मिनट पर होगी। इसका समापन 26 अप्रैल के दिन सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर है।
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Shukra Pradosh Vrat 2025 - फोटो : अमर उजाला
Shukra Pradosh Vrat 2025: हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा का खास महत्व माना गया है। उनकी कृपा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। धार्मिक ग्रंथों में महादेव की महिमा का उल्लेख भलिभांति देखने को मिलता है। कहते हैं कि यदि सच्चे प्रेम भाव से प्रभु को केवल बेलपत्र चढ़ाया जाए, तो वह प्रसन्न होकर सभी कष्टों का निवारण करते हैं। लेकिन महाकाल की विशेष कृपा प्राप्ति के लिए प्रदोष तिथि को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

पंचांग के मुताबिक हर माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। यह दिन भगवान शिव का आशीर्वाद पाने का अवसर है और इस तिथि पर उनके परिवार की भी भव्य पूजा करने से व्यक्ति के लंबे समय से अटके काम बनने लगते हैं। इतना ही नहीं कन्याओं की मनचाहा वर पाने की कामना भी पूर्ण होती हैं।

इस बार वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 25 अप्रैल को सुबह 11: 44 मिनट पर होगी। इसका समापन 26 अप्रैल के दिन सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर है। इसलिए 25 अप्रैल 2025 के दिन प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। इस दिन शुक्रवार का संयोग होने के कारण यह शुक्र प्रदोष कहलाएगा। इस दौरान महादेव की आराधना के साथ-साथ उनके खास मंत्रों का जप करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है। आइए इनके बारे में जानते हैं... 
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Shukra Pradosh Vrat 2025 - फोटो : अमर उजाला
महामृत्युंजय मंत्र
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।
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Shukra Pradosh Vrat 2025 - फोटो : अमर उजाला
सुख और शांति प्राप्त करने का मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्!

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Shukra Pradosh Vrat 2025 - फोटो : अमर उजाला
करचरण कृतं वाक्कायजं कर्मजं वा ।
श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधं ।
विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व ।
जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो ॥
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Shukra Pradosh Vrat 2025 - फोटो : अमर उजाला
भगवान शिव के प्रभावशाली मंत्र
ओम साधो जातये नम:।। ओम वाम देवाय नम:।।
ओम अघोराय नम:।। ओम तत्पुरूषाय नम:।।
ओम ईशानाय नम:।। ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।।
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Shukra Pradosh Vrat 2025 - फोटो : अमर उजाला
भगवान शिव की आरती

ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): 
ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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