फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shravan Maas 2025: कब से शुरू हो रहा है सावन का महीना, जानें व्रत तिथि, पूजन विधि और धार्मिक लाभ

Sun, 18 May 2025 03:07 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Sawan Month Start Date: सावन माह भगवान शिव को समर्पित होता है, जिसमें भक्त विशेष रूप से सोमवार को व्रत और पूजन करते हैं। यह माह आध्यात्मिक उत्थान, मनोकामना पूर्ति और शिव कृपा प्राप्ति का शुभ समय माना जाता है।
विज्ञापन
1 of 6
Sawan 2025 Date - फोटो : adobe
Sawan Puja Rituals: सावन का महीना पूरी तरह भगवान शिव को समर्पित होता है, जिसे शिवभक्त पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं। इस दौरान भक्त रोज़ाना भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं, लेकिन सावन के सोमवार का विशेष महत्व होता है। इस दिन शिव भक्त उपवास रखते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र आदि अर्पित कर जलाभिषेक करते हैं। माना जाता है कि सावन सोमवार का व्रत करने से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्त की हर इच्छा पूरी करते हैं।
Budh Asta 2025: बुध हो रहे हैं अस्त, जानें किन राशियों को मिलेगा लाभ और किन्हें रहना हो सतर्क
सनातन परंपरा के अनुसार, देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और इस अवधि में सृष्टि का संचालन भगवान शिव संभालते हैं। यह समय ‘चातुर्मास’ कहलाता है, जो पूरी तरह धर्म, तप, व्रत और संयम का प्रतीक है। ऐसे में सावन का महीना आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है। भगवान शिव की आराधना से जीवन की समस्याएं दूर होती हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। अब भक्तों को इंतज़ार है सावन के शुभारंभ की तारीख का, जब वे पूरे भक्ति भाव से भोलेनाथ की आराधना में जुट सकें।
Mulank 9: राजयोग लेकर आते हैं मूलांक 9 के जातक, जन्म से ही होता है नेतृत्व का गुण
विज्ञापन

2 of 6
Sawan 2025 Date - फोटो : अमर उजाला
कब से शुरू हो रहा है सावन का महीना 
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष सावन का महीना 11 जुलाई 2025 से शुरू होगा। इससे पहले 10 जुलाई को आषाढ़ पूर्णिमा है, जो 10 जुलाई की रात 1:36 बजे से शुरू होकर 11 जुलाई की रात 2:06 बजे तक रहेगी।  सनातन परंपरा में उदया तिथि को मान्यता दी जाती है, इसी कारण श्रावण मास की प्रतिपदा तिथि 11 जुलाई की रात 11:07 मिनट से आरम्भ होकर 12 जुलाई की रात 2:08 मिनट तक रहेगी। और इसीलिए 11 जुलाई से सावन माह की शुरुआत मानी जाएगी।
विज्ञापन

3 of 6
Sawan 2025 Date - फोटो : freepik
सावन माह पर योग 
इस बार सावन के पहले ही दिन एक विशेष योग बन रहा है, जिसे शिववास योग कहा जाता है। इस शुभ संयोग में भगवान शिव माता पार्वती के साथ कैलाश पर्वत पर विराजमान रहेंगे। मान्यता है कि इस योग में शिवजी की पूजा और जलाभिषेक करने से साधक को सौभाग्य, सुख-समृद्धि और मनचाहा वरदान प्राप्त होता है।

4 of 6
Sawan 2025 Date - फोटो : freepik
सावन के सोमवार व्रत की तिथियां 
14 जुलाई – पहला सोमवार व्रत
21 जुलाई – दूसरा सोमवार व्रत
28 जुलाई – तीसरा सोमवार व्रत
04 अगस्त – चौथा और अंतिम सोमवार व्रत
इसके बाद 09 अगस्त को सावन पूर्णिमा के साथ यह पावन महीना समाप्त होगा। इसी दिन रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाएगा। 
विज्ञापन

5 of 6
Sawan 2025 Date - फोटो : अमर उजाला
पूजा विधि 
  • सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दौरान यदि सही विधि से पूजा की जाए, तो भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। 
  • सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर और पूजा स्थल को साफ करें। फिर पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
  • शिवलिंग को गंगाजल और कच्चे दूध से स्नान कराएं। इसके बाद शुद्ध जल से धोकर साफ करें।
  • शिवलिंग पर बेलपत्र , धतूरा, सफेद पुष्प, भस्म, मिठाई और गाय का दूध अर्पित करें।
  • पूजन के दौरान ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जप करें। चाहें तो शिव जी के 108 नामों का पाठ भी कर सकते हैं।
  • शिव चालीसा का पाठ करें और उसके बाद शिव आरती करें। अंत में हाथ जोड़कर भगवान शिव से अपने जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की कामना करें।
  • सावन में इस तरह श्रद्धा से पूजा करने पर भगवान शिव अपने भक्तों को आशीर्वाद देकर जीवन को खुशहाल बना देते हैं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
Sawan 2025 Date - फोटो : freepik
सावन माह का धार्मिक लाभ 
सावन माह हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है और यह विशेष रूप से भगवान शिव की उपासना का समय होता है। इस माह में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र आदि चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और पापों का नाश होता है। सावन सोमवार का व्रत रखने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और दांपत्य जीवन सुखमय बनता है। इस समय ध्यान, जप, व्रत और दान करने से आत्मिक शुद्धि होती है और पूर्व जन्मों के पाप भी नष्ट होते हैं। यह माह व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान के लिए अत्यंत लाभकारी होता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें