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Maha Ashtami 2025: दुर्गा अष्टमी के दिन न करें ये गलती, व्रत हो सकता है खंडित

Mon, 29 Sep 2025 04:38 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Maha Ashtami 2025: अष्टमी का दिन मां दुर्गा के पूजन का सबसे श्रेष्ठ दिन माना जाता है। कुछ लोग अष्टमी को व्रत खोलते हैं जबकि कुछ नवमी को पारण करते हैं। यही कारण है कि कई बार लोग उलझन में पड़ जाते हैं कि व्रत का समापन कब किया जाए। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं, ताकि व्रत का फल प्राप्त करने में आपसे कोई गलती न हो।
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Shardiya Navratri 2025 - फोटो : freepik
Shardiya Navratri 2025: हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व बड़ी ही श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है। इस बार यह पर्व खास माना जा रहा है क्योंकि नौ दिनों की बजाय यह दस दिन तक चल रहा है। इस बार दुर्गा अष्टमी 30 सितंबर को और नवमी की पूजा 1 अक्तूबर को संपन्न होगी। नवरात्रि के इन दोनों दिनों का अत्यधिक महत्व है। अष्टमी का दिन मां दुर्गा के पूजन का सबसे श्रेष्ठ दिन माना जाता है। कुछ लोग अष्टमी को व्रत खोलते हैं जबकि कुछ नवमी को पारण करते हैं। यही कारण है कि कई बार लोग उलझन में पड़ जाते हैं कि व्रत का समापन कब किया जाए।
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व्रत खोलते समय बरतें सावधानी - फोटो : freepik
व्रत खोलते समय बरतें सावधानी
दुर्गा अष्टमी पर यदि व्रत का पारण करना हो तो इसे कभी भी जल्दबाजी में न करें। शास्त्रों में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि सही विधि से पारण करने पर ही व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है। अष्टमी की रात 12 बजे के बाद व्रत खोलना अनुचित माना जाता है। 
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व्रत खोलते समय बरतें सावधानी - फोटो : freepik
यदि किसी ने पूरे नौ दिन का व्रत रखा है तो उसे नवमी की पूजा विधि-विधान से करने के बाद ही व्रत खोलना चाहिए। इस अवसर पर कन्या पूजन करना और छोटी कन्याओं को भोजन कराना शुभ माना गया है। पूजा के उपरांत उन्हें उपहार या दक्षिणा देना भी आवश्यक होता है। व्रत खोलने के बाद सात्विक और हल्के भोजन का ही सेवन करना उचित माना जाता है।

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किन बातों का रखें ध्यान - फोटो : freepik
किन बातों का रखें ध्यान
नवरात्रि के दौरान कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। पूजा स्थल पर कभी भी चमड़े से बनी वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए और न ही पूजा में इनका उपयोग करना चाहिए। पारण के समय भी पर्स, बेल्ट जैसी लेदर की चीजें अपने साथ नहीं रखें, न ही पहने। 
 
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किन बातों का रखें ध्यान - फोटो : freepik
इसके अलावा इस पूरे पर्व में नकारात्मक कार्यों से दूर रहना चाहिए। झूठ बोलना, किसी का अपमान करना या बुरी आदतों में लिप्त होना वर्जित माना गया है। विशेषकर अष्टमी और नवमी के दिन तो इस बात का और भी अधिक ध्यान रखना चाहिए कि किसी का दिल आहत न हो।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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