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Shardiya Navratri 2025: आज से शारदीय नवरात्रि शुरू, कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि समेत सब कुछ

Mon, 22 Sep 2025 04:51 AM IST
शिखर बरनवाल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Shardiya Navratri 2025 Day 1: आज 22 सितंबर से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो गई है। इस लेख में जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, मां शैलपुत्री की संपूर्ण पूजा विधि, विशेष मंत्र, आरती और उपायों के बारे में जानते हैं, ताकि आपके पहले दिन की पूजा सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।
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शारदीय नवरात्रि 2025 - फोटो : Amar Ujala
Shardiya Navratri 2025 Ghatasthapana Puja Vidhi: शक्ति की आराधना और आध्यात्मिक ऊर्जा का महापर्व शारदीय नवरात्रि आज, यानी 22 सितंबर 2025, सोमवार से प्रारंभ हो गया है। पूरे नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में मां दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी और मां दुर्गा की भक्ति में पूरा देश डूबा रहेगा। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

आज पहले दिन प्रतिपदा तिथि पर, शुभ मुहूर्त में घटस्थापना (कलश स्थापना) के साथ मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। मान्यता है कि इन नौ दिनों में व्रत, पूजा और साधना करने से साधक को देवी की असीम कृपा प्राप्त होती है और उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आइए इस लेख में कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व से लेकर इस पर्व से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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नवरात्रि - फोटो : Adobe Stock
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
शारदीय नवरात्रि के पहले दिन का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान घटस्थापना है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घटस्थापना शुभ मुहूर्त में करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। पंचांग के अनुसार 22 सितंबर को घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 09 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 06 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा यदि कोई इस मुहूर्त में स्थापना न कर पाए तो अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 38 मिनट तक भी कलश स्थापना के लिए उत्तम है।
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पूजा थाली - फोटो : adobe
नवरात्रि पूजा विधि
सबसे पहले पूजा स्थल को गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें। एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद एक मिट्टी के पात्र में जौ बोएं और उसके ऊपर जल से भरा कलश स्थापित करें। कलश पर रोली से स्वास्तिक बनाएं, कलावा बांधें और उसमें सुपारी, सिक्का, अक्षत व आम के पत्ते डालें। फिर एक नारियल पर चुनरी लपेटकर उसे कलश के ऊपर रख दें। इसके बाद सभी देवी-देवताओं का आह्वान कर दीपक जलाएं और मां शैलपुत्री की पूजा करें।

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नवरात्रि - फोटो : Adobe Stock
जौ बोने की विधि
नवरात्रि में जौ बोने का विशेष महत्व है। इसके लिए एक चौड़े मुंह वाला मिट्टी का पात्र लें। उसमें मिट्टी की एक परत बिछाकर जौ के बीज फैला दें। फिर उसके ऊपर मिट्टी की एक और हल्की परत डालें और बहुत थोड़ा जल छिड़कें। मान्यता है कि ये जवारे जितने हरे-भरे उगते हैं, आने वाला वर्ष उतना ही सुख-समृद्धि और संपन्नता से भरा होता है।

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नवरात्रि - फोटो : Adobe Stock
नवरात्रि का महत्व
नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित हैं। यह पर्व स्त्री शक्ति, आस्था और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इन नौ रातों को आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। भक्तगण व्रत रखकर और पूजा-पाठ करके अपने तन, मन और आत्मा को शुद्ध करते हैं। माना जाता है कि इन दिनों में की गई उपासना का फल शीघ्र मिलता है और देवी की कृपा से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

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नवरात्रि - फोटो : Adobe Stock
माता की सवारी
शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि का आरंभ जिस वार को होता है, उसके आधार पर देवी का वाहन तय होता है। इस वर्ष नवरात्रि सोमवार से प्रारंभ हो रही है, इसलिए मां दुर्गा का आगमन हाथी (गज) पर हो रहा है। हाथी पर माता का आगमन अत्यंत शुभ माना जाता है। यह अच्छी वर्षा, सुख-समृद्धि और राष्ट्र में उन्नति का सूचक है। इससे देश में अन्न-धन के भंडार भरे रहते हैं और खुशहाली आती है।

 
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नवरात्रि - फोटो : Adobe Stock
शारदीय नवरात्रि 2025 कैलेंडर
  • 22 सितंबर (दिन 1)- मां शैलपुत्री पूजा, घटस्थापना
  • 23 सितंबर (दिन 2)- मां ब्रह्मचारिणी पूजा
  • 24 सितंबर (दिन 3)- मां चंद्रघंटा पूजा
  • 26 सितंबर (दिन 4)- मां कूष्मांडा पूजा
  • 27 सितंबर (दिन 5)- मां स्कंदमाता पूजा
  • 28 सितंबर (दिन 6)- मां कात्यायनी पूजा
  • 29 सितंबर (दिन 7)- मां कालरात्रि पूजा
  • 30 सितंबर (दिन 8)- मां महागौरी पूजा (दुर्गा अष्टमी)
  • 1 अक्टूबर (दिन 9)- मां सिद्धिदात्री पूजा (महानवमी)
  • 2 अक्टूबर- दुर्गा विसर्जन, विजयादशमी (दशहरा)


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नवरात्रि 2025 - फोटो : adobe stock
मां दुर्गा की आरती

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
जय अम्बे गौरी
माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्जवल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
जय अम्बे गौरी

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥
जय अम्बे गौरी
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥
जय अम्बे गौरी

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥
जय अम्बे गौरी
शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥
जय अम्बे गौरी

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
जय अम्बे गौरी
ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥
जय अम्बे गौरी

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूँ।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥
जय अम्बे गौरी
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥
जय अम्बे गौरी

भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥
जय अम्बे गौरी
कन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
जय अम्बे गौरी

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥
जय अम्बे गौरी


 

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माता रानी का विशेष मंत्र - फोटो : अमर उजाला
माता रानी का विशेष मंत्र
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। उनकी कृपा पाने के लिए पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करना चाहिए। यह मंत्र साधक के जीवन में स्थिरता और शक्ति लाते हैं।

सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तुते।।
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:।।

मां शैलपुत्री का बीज मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥

स्तुति मंत्र: वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।।
या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:।।
 
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नवरात्रि - फोटो : Adobe Stock
नवरात्रि में जरूर करें ये सरल उपाय
अखंड ज्योत
यदि संभव हो तो नौ दिनों के लिए घर में अखंड ज्योत जलाएं। यह देवी के प्रति आपकी अटूट आस्था का प्रतीक है और घर की सभी नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर सुख-शांति लाता है।

लाल पुष्प और श्रृंगार
प्रतिदिन मां दुर्गा को लाल गुड़हल का फूल या कोई अन्य लाल पुष्प अर्पित करें। साथ ही, नवरात्रि में किसी एक दिन मां को सोलह श्रृंगार का सामान भेंट करें। इससे देवी अत्यंत प्रसन्न होती हैं और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।  

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