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Sharad Purnima 2025: कब है शरद पूर्णिमा? जानें क्यों रखी जाती है खुले आसमान के नीचे खीर

Sat, 04 Oct 2025 06:58 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Sharad Purnima 2025: अश्विन महीने की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह दिन साल की सबसे खास पूर्णिमाओं में से एक है, क्योंकि इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की आराधना की जाती है।
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शरद पूर्णिमा 2025 - फोटो : अमर उजाला
Sharad Purnima Puja Vidhi: अश्विन महीने की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह दिन साल की सबसे खास पूर्णिमाओं में से एक है, क्योंकि इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की आराधना की जाती है। साथ ही, चंद्रमा की उपासना भी की जाती है, जिससे मनुष्य को आध्यात्मिक और भौतिक दोनों ही प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं। शरद पूर्णिमा को स्वास्थ्य, समृद्धि और सुख-शांति के लिए शुभ माना जाता है।
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इस पावन अवसर पर लोग उपवास रखते हैं और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं ताकि जीवन में सकारात्मक बदलाव आएं। शरद पूर्णिमा का समय और इसका महत्व जानना बेहद जरूरी होता है ताकि पूजा और व्रत सही मुहूर्त में किए जा सकें। आइए, जानें इस वर्ष शरद पूर्णिमा कब है और इसके पीछे छिपी आध्यात्मिक कहानियों और मान्यताओं के बारे में।
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पूर्णिमा की शुरुआत 6 अक्टूबर दोपहर 12:23 बजे के करीब होगी और यह 7 अक्टूबर सुबह 9:16 बजे तक रहेगी। - फोटो : Freepik
शरद पूर्णिमा कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल शरद पूर्णिमा की तिथि आश्विन महीने की पूर्णिमा को पड़ रही है। पूर्णिमा की शुरुआत 6 अक्टूबर दोपहर 12:23 बजे के करीब होगी और यह 7 अक्टूबर सुबह 9:16 बजे तक रहेगी। चंद्रमा की पूजा और दर्शन का समय भी 6 अक्टूबर को ही है, इसलिए शरद पूर्णिमा इस साल 6 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन की खास परंपरा है कि रात को चंद्रमा की अमृत जैसी रोशनी में खीर रखी जाती है, जिसे अगले दिन खाकर स्वास्थ्य और सौभाग्य की कामना की जाती है।
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खीर में चंद्रमा की अमृत किरणें पड़ने से वह विशेष स्वास्थ्यवर्धक और सौभाग्यवर्धक बन जाती है। - फोटो : adobe
शरद पूर्णिमा का महत्व
हिंदू मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणें अमृत समान होती हैं। ये किरणें मन को शांति देती हैं और शरीर को ताजगी व ऊर्जा से भर देती हैं। इस दिन चंद्र देवता, माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। खीर में चंद्रमा की अमृत किरणें पड़ने से वह विशेष स्वास्थ्यवर्धक और सौभाग्यवर्धक बन जाती है।

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शरद पूर्णिमा की रात क्यों है खास? - फोटो : शरद पूर्णिमा की रात क्यों है खास?
शरद पूर्णिमा की रात क्यों है खास?
शरद पूर्णिमा की रात को खास माना जाता है क्योंकि इस दिन चंद्रमा अपनी पूरी चमक के साथ जगमगाता है और उसकी किरणों से अमृत की बूंदें बरसती हैं, ऐसा विश्वास किया जाता है। लोग मानते हैं कि इस रात का प्रकाश अन्य दिनों की तुलना में अधिक पवित्र और शक्तिशाली होता है। इसके अलावा, शरद पूर्णिमा की रात देवी लक्ष्मी धरती पर आकर भ्रमण करती हैं। जो भी इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करता है, उस पर उनकी विशेष कृपा और आशीर्वाद बरसते हैं, जिससे व्यक्ति के घर में धन-धान्य और समृद्धि आती है।
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शरद पूर्णिमा पर क्या नहीं करना चाहिए - फोटो : Freepik
शरद पूर्णिमा पर क्या नहीं करना चाहिए
  • इस दिन तामसिक भोजन जैसे मांसाहार और मदिरा का सेवन वर्जित है क्योंकि ऐसा करने से देवी लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं और आर्थिक संकट आ सकता है।
  • काले रंग के कपड़े पहनने से बचें, क्योंकि यह अशुभ माना जाता है। सफेद कपड़े पहनना शुभ होता है।
  • घर में झगड़ा-रंग-रिवाज न करें, ताकि सुख-शांति बनी रहे और देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहे।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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