इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत करती हैं और शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद ही अपना व्रत खोलती हैं।
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करवा चौथ पर चांद का महत्व
करवा चौथ का व्रत विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र, खुशहाली और समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत करती हैं और शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद ही अपना व्रत खोलती हैं। पूजा के दौरान वे भगवान गणेश, शिव-पार्वती और कार्तिकेय की भी आराधना करती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती को अखंड सौभाग्य का वरदान मिला है, इसलिए महिलाएं अपनी सात जन्मों के लिए पति के सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की प्रार्थना करती हैं। चंद्रमा का इस व्रत में विशेष महत्व है क्योंकि चंद्रमा के दर्शन व्रत खोलने का शुभ समय होते हैं।
एक कथा के अनुसार, भगवान गणेश ने चंद्रमा को श्राप दिया था कि जो कोई भी उसे सीधे आंखों से देखेगा, उसे अपमान और कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। इसलिए करवा चौथ के दिन महिलाएं चंद्रमा को सीधे नहीं देखतीं, बल्कि छलनी के माध्यम से देखती हैं। इस दिन छलनी में जलता दीपक भी बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि उसकी रोशनी नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है और व्रत का फल शुभ होता है।