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Shani Jayanti 2020: जानिए शनिदेव से जुड़ी 10 जानकारियां

Fri, 22 May 2020 06:16 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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शनि जयंती 2020: शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए उन्हें तेल चढ़ाया जाता है।
22 मई को शनि अमावस्या का दिन है। इस दिन शनि दोषों से मुक्ति के लिए शनिदेव की विशेष पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि शनि की नजर जिस किसी पर पड़ जाती है उसको कई तरह की परेशानियां आने लगती है। शनि अगर प्रसन्न हो जाएं तो व्यक्ति को राजा भी बना देते हैं। पुराणों में शनिदेव से जुड़ी कई तरह की मान्यताएं है। आइए जानते हैं शनि से जुड़े कुछ रोचक तथ्य।  
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शनिदेव लंगड़े क्यों
शनिदेव के धीमी चाल और लंगड़ा कर चलने के पीछे पिप्पलाद मुनि के कोप का ही कारण है। पिप्लाद मुनि अपने पिता की मृत्यु का कारण शनिदेव को मानते थे। पिप्पलाद मुनि ने शनि पर ब्रह्रादण्ड से प्रहार किया। शनि यह प्रहार सहन करने में असमर्थ थे जिस कारण से शनि तीनों लोकों में दौड़ने लगे। इसके बाद ब्रह्रादण्ड ने उन्हें लंगड़ा कर दिया।
22 मई को शनि जयंती, उससे पहले जानें कहीं शनि आपकी राशि के लिए घातक तो नहीं !
 
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भगवान शिव ने शनि को दण्डाधिकारी नियुक्ति
शनिदेव और भगवान शिव के बीच युद्ध भी हुआ था। भयानक युद्ध के बाद भगवान शिव ने शनि को परास्त कर दिया था। बाद में सूर्यदेव की प्रार्थना पर भगवान शिव ने उन्हें माफ किया। शनि के रण कौशल से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपना सेवक और दण्डाधिकारी नियुक्ति कर लिया। 

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शनिदेव काले क्यों
शनिदेव के पिता का नाम सूर्यदेव और माता का नाम छाया है। छाया भगवान शिव की बहुत बड़ी भक्त थीं और वह अपने गर्भ में पल रहे शनि की चिंता किए बगैर हमेशा भगवान शिव की तपस्या में लीन रहती थीं। इस कारण से ना तो वह खुद अपना और ना ही गर्भ में पल रहे अपने बच्चे का ध्यान रख पाती थीं। जिसके कारण से शनि काले और कुपोषित पैदा हुए।
 
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बच्चों पर क्यों नहीं पड़ती शनि छाया
12 साल तक के बच्चों पर शनि का प्रकोप कभी नहीं रहता है। इसके पीछे पिप्पलाद और शनि के बीच हुए युद्ध का कारण है। पिप्पलाद ने युद्ध में शनि को परास्त कर दिया और इस शर्त पर छोड़ा कि वे 12 वर्ष तक की आयु के बच्चों को किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं देंगे।
 
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सभी ग्रहों में श्रेष्ठ शनि
शनिदेव सभी नौ ग्रहों में सबसे श्रेष्ठ होने का भगवान शिव से आशीर्वाद मिला है। इनकी दृष्टि से मनुष्य क्या देवता भी भयभीत रहते हैं।
 
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शनिदेव की कुदृष्टि कई देवताओं और राजाओं पर पड़ी
शनिदेव की कुदृष्टि से कई देवी-देवताओं को शिकार होना पड़ा था। शनि के कारण ही भगवान गणेश का सिर कटा था। इसके अलावा भगवान राम को वनवास और रावण का संहार शनि के कारण ही हुआ था। शनि की काली छाया की वजह से ही पांडवों का वनवास का दर्द झेलना पड़ा था। इसके अलावा राजा विक्रमादित्य और त्रेता युग में राजा हरीशचन्द्र को शनि के कारण दर-दर की ठोकरें खानी पड़ी।

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shani dev - फोटो : shani dev
शनि की छाया अशुभ क्यों
शनि की कुदृष्टि का कारण उनकी पत्नी द्वारा दिए गए शाप के कारण है। एक बार शनिदेव की पत्नी पुत्र की लालसा में उनके पास पहुंची लेकिन शनिदेव कठिन तपस्या में लीन थे। इससे आहत होकर पत्नी ने शनिदेव को शाप दिया कि जिस पर भी आपकी दृष्टि पड़ेगी उसका सबकुछ नष्ट हो जाएगा।  

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शनि के रत्न 
शनि को नीलम रत्न और नीले रंग का फूल बहुत ही पसंद होता है जो भक्त शनिवार के दिन नीले रंग का फूल चढ़ाता है उससे शनिदेव बहुत ही प्रसन्न होते हैं।
 

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shani dev
शनि के ऐसे ना करें दर्शन
मंदिर में शनि की पूजा करते समय एक बात का जरूर ध्यान रखना चाहिए। पूजा में कभी की शनिदेव की आंखों में आंख डालकर नहीं देखना चाहिए बल्कि पैरों की तरफ देखना चाहिए। शनिदेव की आंखों देखने से शनि संकट का खतरा बढ़ जाता है।
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शनि की धीमी चाल
शनि एक राशि में आने के लिए 30 वर्षों का समय लेते हैं। शनि सभी ग्रहों में सबसे धीमी चाल से चलने वाले ग्रह है।
 
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