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Pradosh Vrat 2025: सितंबर में कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत ? जानें तिथि और पूजा विधि

Fri, 29 Aug 2025 12:54 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

September Pradosh Vrat Date 2025: भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत सर्वश्रेष्ठ है। यह उपवास हर महीने के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन महादेव की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती हैं। 
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September Pradosh Vrat 2025 - फोटो : अमर उजाला
Pradosh Vrat Date 2025: भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत सर्वश्रेष्ठ है। यह उपवास हर महीने के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन महादेव की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती हैं। इसके अलावा महिलाओं को वैवाहिक जीवन सुखमय का विशेष आशीर्वाद भी मिलता है। धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक प्रदोष व्रत के प्रभाव से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं और उसे शिव जी की असमी कृपा मिलती हैं। इस दिन केवल भोलेनाथ को कच्चा दूध चढ़ाने से सभी प्रकार की इच्छाएं पूरी होती हैं। वहीं सितंबर माह में यह व्रत कब रखा जाएगा, यह असमंजस बना हुआ है। ऐसे में आइए सितंबर महीने के प्रदोष व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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September Pradosh Vrat 2025 - फोटो : freepik
कब है प्रदोष व्रत 
पंचांग के मुताबिक भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 5 सितंबर को सुबह 4 बजकर 8 मिनट पर होगा। इसका समापन 6 सितंबर को तड़के 3 बजकर 12 मिनट पर होगा। ऐसे में 5 सितंबर 2025 को इस महीने का पहला प्रदोष व्रत रखा जाएगा।
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September Pradosh Vrat 2025 - फोटो : Freepik
शुभ मुहूर्त
पंचांग के मुताबिक 5 सितंबर को प्रदोष व्रत के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 38 मिनट से रात 8 बजकर 55 मिनट के बीच तक रहेगा। इसके अलावा इस दिन शोभन, सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग का संयोग इस व्रत पर बना रहेगा।

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September Pradosh Vrat 2025 - फोटो : adobe
पूजा विधि
  • प्रदोष व्रत के दिन पूजा हमेशा प्रदोष काल में की जाती है। इसलिए पूजा के लिए सबसे पहले चौकी पर शिव-पार्वती की मूर्ति को स्थापित करें।
  • शिव परिवार को वस्त्र पहनाएं और सभी को फूल माला अर्पित करें।
  • अब शिवलिंग पर दूध, शहद, शक्कर और घी-गंगाजल से अभिषेक करें और फिर प्रभु को शमी का फूल और बेलपत्र अर्पित करें
  • अब देवी को श्रृंगार का समान और शिव जी को चंदन लगाएं। इसके बाद आप शुद्ध घी से दीपक जलाएं और ऊँ नम: शिवाय।।मंत्र का जाप करें।
  • शिव चालीसा का पाठ करें और प्रदोष व्रत कथा पढ़ें। अंत में आरती करें और क्षमतानुसार जरूरतमंदों को अन्न दान करें।
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September Pradosh Vrat 2025 - फोटो : Amar Ujala
भगवान शिव की आरती

ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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