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Sawan Shivratri 2026: कब है सावन शिवरात्रि? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और भगवान शिव को प्रसन्न करने के उपाय

Sun, 02 Aug 2026 01:17 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Masik Shivratri 2026 श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को सावन शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। आइए जानते हैं कि इस वर्ष शिवरात्रि किस दिन मनाई जाएगी।
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Sawan Shivratri 2026 - फोटो : AI
Sawan Shivratri 2026 Date: सावन शिवरात्रि का हिंदू धर्म में बेहद खास स्थान है। यह पर्व श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि पूरा सावन महीना भगवान शिव को समर्पित होता है, इसलिए इस दिन की गई पूजा, व्रत, रुद्राभिषेक और मंत्र जाप का फल कई गुना बढ़ जाता है। इसी कारण इस अवसर पर देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की बड़ी संख्या देखने को मिलती है।

इस दिन श्रद्धालु भगवान शिव को जल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करते हैं। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन और श्रद्धा के साथ की गई शिव भक्ति से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। साथ ही भक्तों की मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं।
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कब है सावन की शिवरात्रि? - फोटो : अमर उजाला
कब है सावन की शिवरात्रि?
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष सावन शिवरात्रि की चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को सुबह 4 बजकर 53 मिनट से शुरू होगी और 12 अगस्त को रात 1 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। चूंकि शिवरात्रि में रात्रि पूजन का विशेष महत्व होता है, इसलिए 11 अगस्त को ही यह पर्व मनाना अधिक उचित माना जाएगा। इस दिन रात्रि के चारों प्रहर में भगवान शिव की पूजा करने का विधान है।
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चार प्रहर की पूजा का समय - फोटो : Adobe Stock
चार प्रहर की पूजा का समय
प्रथम प्रहर की पूजा- शाम 07:04 बजे से रात 09:45 बजे तक
द्वितीय प्रहर की पूजा- रात 09:45 बजे से रात 12:26 बजे तक
तृतीय प्रहर की पूजा- रात 12:26 बजे से सुबह 03:07 बजे तक
चतुर्थ प्रहर की पूजा सुबह 03:07 बजे से सुबह 05:49 बजे तक
इन चारों समयों में श्रद्धा के साथ पूजा करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।
 

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सावन शिवरात्रि का धार्मिक महत्व - फोटो : Adobe Stock
सावन शिवरात्रि का धार्मिक महत्व 
सावन शिवरात्रि का धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में भगवान शिव की उपासना करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस दिन व्रत रखने, रात्रि जागरण करने और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करने से पापों का नाश होता है और मन को शांति मिलती है। साथ ही आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी खुलता है।
 
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सावन शिवरात्रि का धार्मिक महत्व - फोटो : freepik
अविवाहित युवक-युवतियां इस दिन मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से व्रत रखते हैं, जबकि विवाहित लोग अपने वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और दीर्घायु के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं।  

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

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