माघ माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी बेहद खास मानी जाती है। इस दिन सभी सकंट हरने वाले भगवान गणेश की पूजा की जाती है, इसीलिए इसे सकंष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है। इस बार वर्ष का पहला संकष्टी गणेश चौथ 5 जनवरी को है। इसे व्रकतुंडी चतुर्थी, माही चौथ और तिलकुट व्रत चतुर्थी भी कहा जाता है। पुराणों में इस व्रत का काफी महत्व है। खासकर महिलाओं के लिए इस व्रत को काफी उपयोगी माना जाता है। जानें व्रत करने का सही तरीका
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इस चतुर्थी के दिन गणेश जी को तिल का प्रसाद अर्पित करके पूजा करने का विधान है इसलिए इसे तिल चतुर्थी भी कहा जाता है। इस दिन गणेश जी का पंचामृत से स्नान करने के बाद, लाल फूल, अक्षत, रोली, मौली अर्पित करें साथ ही तिल से बनी वस्तुओं का भोग लगाए।
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गणेश जी को भगवान शिव से वरदान प्राप्त है कि जो व्यक्ति संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत रखकर गणेश जी की पूजा करेगा और शाम में चन्द्रोदय के बाद शिव सहित गणेश जी की पूजा करेगा उसके सारे संकट दूर हो जाएंगे। गणेश जी के पूजा-अर्चना के बाद रात 9.30 बजे चंद्रोदय के समय चंद्र देवता को अर्घ्य दें।