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Sankashti Chaturthi June 2025: संकष्टी चतुर्थी कब? जानें इस दिन क्या खाएं और क्या नहीं और पूरी व्रत विधि

Thu, 12 Jun 2025 06:28 AM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Sankashti Chaturthi: संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है, जिससे सभी बाधाएं दूर होती हैं। सही विधि से पूजा और उपवास करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और कष्टों से मुक्ति मिलती है।
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Sankashti Chaturthi Vrat Puja Vidhi - फोटो : freepik
Sankashti Chaturthi Vrat Puja Vidhi: संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है, जिसे हर महीने चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस दिन श्रद्धापूर्वक गणेश जी की पूजा की जाती है और उनसे सभी कष्टों और बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना की जाती है। मान्यता है कि विघ्नहर्ता की उपासना से जीवन की समस्याएं हल होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। पूजा मुख्य रूप से दिन में की जाती है, जबकि व्रत चंद्रमा के उदय के बाद अर्घ्य देकर खोला जाता है।
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यदि आप संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने जा रहे हैं, तो कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है। व्रत का संपूर्ण फल तभी मिलता है जब इसे विधिपूर्वक किया जाए। सबसे महत्वपूर्ण है  चंद्र दर्शन और चंद्रमा को अर्घ्य देना। यदि यह चरण छूट जाए, तो उपवास अधूरा माना जाता है। अतः व्रत के दिन संयम, शुद्धता और नियमों का पालन करें, जिससे भगवान गणेश की कृपा आप पर बनी रहे और जीवन में शांति व समृद्धि बनी रहे।
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Sankashti Chaturthi Vrat Puja Vidhi - फोटो : freepik
कब है आषाढ़ मास की संकष्टी चतुर्थी व्रत?
आषाढ़ मास की संकष्टी चतुर्थी व्रत तिथि इस वर्ष 14 जून 2025, शनिवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 14 जून को दोपहर 3:46 बजे आरंभ होकर 15 जून को दोपहर 3:51 बजे तक रहेगी। चूंकि चतुर्थी की तिथि का उदय 14 जून को हो रहा है, इसलिए यही दिन व्रत और पूजा के लिए मान्य रहेगा।
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Sankashti Chaturthi Vrat Puja Vidhi - फोटो : freepik
पूजा मुहूर्त और शुभ योग
इस दिन पूजा के लिए कई विशेष मुहूर्त और शुभ योग बन रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:02 से 4:43 बजे तक रहेगा, जो ध्यान और मंत्र जप के लिए श्रेष्ठ समय है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:54 से 12:49 बजे तक और निशीथ काल रात 12:01 से 12:42 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, शुभ मुहूर्त सुबह 7:07 से 8:52 बजे तक है, जो पूजा और व्रत की शुरुआत के लिए उत्तम है।
इस बार की संकष्टी चतुर्थी पर कई शुभ योगों का संयोग भी बन रहा है। ब्रह्म योग सुबह से लेकर दोपहर 1:13 बजे तक रहेगा, उसके बाद इंद्र योग का आरंभ होगा जो रात तक प्रभावी रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग रात 12:22 से अगले दिन सुबह 5:23 बजे तक रहेगा, जो हर प्रकार की सफलता के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। चतुर्थी के दिन उत्तराषाढा नक्षत्र भी रहेगा, जो मध्य रात्रि 12:22 बजे तक प्रभावी रहेगा, इसके बाद श्रवण नक्षत्र आरंभ होगा।

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Sankashti Chaturthi Vrat Puja Vidhi - फोटो : एएनआई
चंद्रोदय का समय
14 जून की रात 10:07 बजे चंद्रमा उदित होगा। इसी समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण (समापन) किया जाता है। व्रत की पूर्णता के लिए चंद्र दर्शन और अर्घ्य देना अनिवार्य होता है।
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Sankashti Chaturthi Vrat Puja Vidhi - फोटो : Adobe Stock
संकष्टी चतुर्थी व्रत में क्या खा सकते हैं?
  • व्रत के दौरान हल्का, सात्त्विक और फलाहारी भोजन करना चाहिए।
  • ताजे फल जैसे सेब, केला, पपीता, अंगूर, संतरा, अनार आदि ले सकते हैं।
  • दूध, दही, पनीर, छाछ, मावा जैसे डेयरी उत्पाद भी सेवन में उचित हैं।
  • अनाज की जगह आप साबूदाने की खिचड़ी, वड़ा या खीर, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की पूरी, चीला, हलवा, और उबली या भुनी शकरकंद खा सकते हैं।
  • भुनी मूंगफली, नारियल पानी, और सूखे मेवे जैसे बादाम, काजू, किशमिश, अखरोट भी व्रत में लिए जा सकते हैं, भोजन में सेंधा नमक का ही प्रयोग करें।
 
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Sankashti Chaturthi Vrat Puja Vidhi - फोटो : Adobe stock
व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए?
  • संकष्टी चतुर्थी व्रत के दौरान चावल, गेहूं, दालें, सूजी, मैदा जैसे अनाज नहीं खाए जाते।
  • सामान्य नमक की जगह केवल सेंधा नमक ही प्रयोग करें।
  • प्याज, लहसुन, मसालेदार या तामसिक भोजन, मांसाहार, अंडा और किसी भी प्रकार का नशा वर्जित होता है।
  • बहुत ज़्यादा तला-भुना या भारी भोजन भी नहीं लेना चाहिए।
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Sankashti Chaturthi Vrat Puja Vidhi - फोटो : freepik
संकष्टी चतुर्थी व्रत कैसे करें?
  • व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • पूजा स्थल को साफ करके भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
  • फिर हाथ में जल और फूल लेकर व्रत का संकल्प लें कि आप यह उपवास पूरी श्रद्धा से कर रहे हैं।
  • पूरे दिन ‘ॐ गं गणपतये नमः’ या ‘ॐ भालचंद्राय नमः’ मंत्र का जाप करते रहें।
  • अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार या निर्जल व्रत करें और मानसिक रूप से शांत और एकाग्र रहें।
  • शाम को प्रदोष काल या चंद्रमा के निकलने से पहले दोबारा स्नान करें ।
  • भगवान गणेश को दूर्वा (21 गांठ), लाल फूल, मोदक, तिल के लड्डू, फल, चंदन, धूप-दीप, माला आदि अर्पित करें।
  • गणेश चालीसा का पाठ करें, संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा अवश्य सुनें या पढ़ें।
  • इसके बाद ‘ॐ वक्रतुंडाय हुम्’ या ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें और अंत में गणेश जी की आरती करके व्रत को पूर्ण करें।
  • जब चंद्रमा उदय हो तब उन्हें अर्घ्य अर्पित करें और व्रत खोलें।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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