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Sankashti Chaturthi 2026: जुलाई में कब है संकष्टी चतुर्थी? जानें सही डेट, पूजा का शुभ मुहूर्त और व्रत विधि

Wed, 01 Jul 2026 03:27 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Sankashti Chaturthi 2026: शास्त्रों की मानें, तो जो भक्त नियमित रूप से संकष्टी चतुर्थी व्रत का पालन करते हैं, उन्हें बुद्धि, विवेक, सुख-समृद्धि, संतान सुख और कार्यों में सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 
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Sankashti Chaturthi 2026 - फोटो : Amar Ujala
Sankashti Chaturthi 2026: शास्त्रों के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। यह पावन दिन भगवान श्रीगणेश को समर्पित होता है। मान्यता है कि, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत रखने पर सभी संकट दूर होते हैं और कार्यों में आ रही बाधाएं समाप्त होती हैं। साथ ही भगवान गणेश की कृपा से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। शास्त्रों की मानें, तो संकष्टी चतुर्थी का व्रत आर्थिक, पारिवारिक, करियर या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को समाप्त करने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि, जुलाई 2026 में संकष्टी चतुर्थी कब है और इसका शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

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Sankashti Chaturthi 2026 - फोटो : freepik
जुलाई 2026 में संकष्टी चतुर्थी कब है?
पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 3 जुलाई 2026 को सुबह 11:21 मिनट पर होगा। चतुर्थी तिथि समाप्त 4 जुलाई 2026 को दोपहर 12:40 मिनट पर होगी। तिथि के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का व्रत शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को रखा जाएगा।
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Sankashti Chaturthi 2026 - फोटो : freepik
संकष्टी चतुर्थी 2026 पूजा विधि
  • प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल को साफ करके भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • भगवान गणेश को दूर्वा, अक्षत और दीप अर्पित करें।
  • इस दौरान मोदक, लड्डू या गुड़-चने का भोग लगाएं।
  • "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें।
  • दिनभर व्रत रखें और भगवान गणेश का ध्यान करें।
  • रात्रि में चंद्रमा के उदय होने पर उन्हें अर्घ्य अर्पित करें।
  • इसके बाद भगवान गणेश की पुनः आरती करें और चंद्र दर्शन के पश्चात व्रत का पारण करें।
  • अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद लोगों को भोजन या दान अवश्य दें। 
 
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Sankashti Chaturthi 2026 - फोटो : freepik
गणेश जी की आरती 
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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