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Sakat Chauth 2025: कब रखा जाएगा सकट चौथ का व्रत ? किस विधि से करनी चाहिए पूजा, यहां जानें सबकुछ

Tue, 07 Jan 2025 05:15 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Sakat Chauth 2025: हिंदू धर्म में सकट चौथ के व्रत को बेहद ही महत्वपूर्ण माना गया है, यह उपवास मुख्य रूप से संतान की तरक्की और लंबी उम्र के लिए रखा जाता है। 
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Sakat Chauth 2025 - फोटो : अमर उजाला
Sakat Chauth 2025: हिंदू धर्म में सकट चौथ के व्रत को बेहद ही महत्वपूर्ण माना गया है, यह उपवास मुख्य रूप से संतान की तरक्की और लंबी उम्र के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि सकट का उपवास रखने से संतान के जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। कहते हैं कि यदि सच्चे भाव से सकट का व्रत रखा जाए तो संतान सुख की प्राप्ति होती हैं, इसे तिलकुटा चौथ, वक्र-तुण्डि चतुर्थी और माघी चौथ भी कहते हैं। वहीं नववर्ष 2025 में यह व्रत कब रखा जाएगा ? यह सवाल लगभग सभी के मन में बना हुआ है, ऐसे में आइए इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि सकट चौथ कब है, इस दिन गणेश जी की पूजा कैसे करनी चाहिए, ये सभी चीजें विस्तार से जानेंगे। 
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Sakat Chauth 2025 - फोटो : freepik
सकट चौथ तिथि 2025
पंचांग के मुताबिक सकट चौथ की तिथि 17 जनवरी को सुबह 4 बजकर 6 मिनट पर शुरू हो रही है, तिथि का समापन 18 जनवरी को सुबह 5 बजकर 30 मिनट पर होगा। उदय तिथि के अनुसार 17 जनवरी शुक्रवार को सकट चौथ का पर्व मनाया जाएगा।
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Sakat Chauth 2025 - फोटो : freepik
सकट चौथ शुभ योग 2025
ज्योतिष गणना के अनुसार सकट चौथ पर सौभाग्य का योग बन रहा है। इस तिथि पर मघा नक्षत्र पर बव, बालव करण का संयोग रहेगा। इस दौरान चन्द्रमा सिंह राशि में रहेंगे।

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Sakat Chauth 2025 - फोटो : freepik
चंद्रोदय का समय
संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रमा की पूजा करने का विधान है, इसके बाद ही महिलाएं अपने व्रत का पारण करती हैं। ऐसे में सकट के दिन चंद्रोदय का समय रात 9:09 मिनट पर है।

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Sakat Chauth 2025 - फोटो : freepik
पूजा विधि
  • सकट पर पूजा के लिए सबसे पहले एक लकड़ी की चौकी पर गणपति जी की मूर्ति स्थापित करें।
  • इसके बाद गणेश जी को तिलक लगाएं।
  • घी का दीपक जलाएं।
  • गणेश जी को फूल चढ़ाएं।
  • अब उन्हें फल और मिठाई का भोग लगाएं।
  • तिलकुट का प्रसाद अवश्य शामिल करें।
  • गणेश चालीसा का पाठ करें।
  • अंत में गणेश जी की आरती करें। 
  • सुख-समृद्धि का कामना करते हुए पूजा समाप्त करें।
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Sakat Chauth 2025 - फोटो : freepik
गणेश जी की आरती 
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

 
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