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Rang Panchami 2026: आखिर क्यों मनाई जाती है रंग पंचमी? जानें इससे जुड़ी कथा और मान्यताएं

Sat, 07 Mar 2026 05:30 PM IST
Jyoti Mehra धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Rang Panchami 2026: वर्ष 2026 में रंग पंचमी का पर्व 8 मार्च, रविवार के दिन मनाया जाएगा। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर बधाइयां देते हैं। आइए जानते हैं कि रंग पंचमी मनाने के पीछे क्या मान्यताएं जुड़ी हैं।
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क्यों मनाई जाती है रंग पंचमी? - फोटो : Amar Ujala
Rang Panchami 2026: होली के ठीक पांच दिन बाद यानी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर रंग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 8 मार्च, रविवार के दिन पड़ रहा है। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर खुशियां बांटते हैं और बधाइयां देते हैं। हालांकि रंग पंचमी का उत्सव पूरे देश में मनाया जाता है, लेकिन मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों में इसकी विशेष धूम देखने को मिलती है। आइए जानते हैं कि रंग पंचमी मनाने के पीछे क्या मान्यताएं जुड़ी हैं। साथ ही जानें के इस दिन किए जाने वाले कुछ लाभकारी उपाय...

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क्यों मनाई जाती है रंग पंचमी? - फोटो : Adobe
क्यों मनाई जाती है रंग पंचमी?
रंग पंचमी के पीछे कई पौराणिक मान्यताएं प्रचलित हैं। एक कथा के अनुसार प्राचीन समय में हिरण्यकश्यप नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली असुर था। वह स्वयं को भगवान से भी अधिक श्रेष्ठ मानता था और भगवान विष्णु को अपना शत्रु समझता था। हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था।

जब हिरण्यकश्यप को अपने पुत्र की भक्ति के बारे में पता चला तो उसने उसे भगवान विष्णु की उपासना करने से रोकने की बहुत कोशिश की, लेकिन प्रह्लाद अपने विश्वास से नहीं डिगे। इसके बाद हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र को मारने के लिए कई प्रयास किए, परंतु हर बार वह असफल रहा।
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Holi 2026 - फोटो : Adobe stock
हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को अग्नि में न जलने का वरदान प्राप्त था। उसने प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने की योजना बनाई ताकि प्रह्लाद जलकर भस्म हो जाए। लेकिन भगवान की कृपा से होलिका स्वयं अग्नि में जल गई और प्रह्लाद सुरक्षित बच गए। इस घटना से प्रसन्न होकर ऋषि-मुनियों और भक्तों ने रंग-गुलाल लगाकर धर्म की विजय का उत्सव मनाया। तभी से रंग पंचमी का पर्व मनाया जाने लगा। समय के साथ यह परंपरा कुछ क्षेत्रों तक सीमित हो गई, जिनमें मालवा क्षेत्र की रंग पंचमी विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
 

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रंग पंचमी कथा - फोटो : Amar Ujala
रंग पंचमी की कथा
एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने राधा रानी के साथ चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को रंगों से होली खेली थी। जब गोपियों ने देखा कि राधा रानी भगवान कृष्ण के प्रेम में मग्न हैं, तो वे भी इस लीला में शामिल हो गईं और सभी ने मिलकर रंगों से होली खेली। उस दिन पूरी धरती रंगों से सराबोर हो गई और वातावरण बेहद आनंदमय हो गया।

कहते हैं कि स्वर्ग से देवी-देवताओं ने जब यह दृश्य देखा तो उनके मन में भी भगवान कृष्ण और राधा रानी के साथ होली खेलने की इच्छा जाग उठी। तब वे ग्वालों और गोपियों का रूप धारण कर धरती पर आए और इस उत्सव में शामिल हुए। इसी कारण रंग पंचमी को देवी-देवताओं की होली भी कहा जाता है। मान्यता है कि आज भी भगवान कृष्ण और राधा रानी वेश बदलकर इस दिन अपने भक्तों के साथ रंग खेलने आते हैं।
 
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रंग पंचमी के उपाय - फोटो : Amar Ujala
रंग पंचमी के उपाय
  • रंग पंचमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण को पीला रंग अर्पित करने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
  • इस दिन हनुमान जी की पूजा करके 5 बार हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है।
  • शिवलिंग पर पानी में शहद मिलाकर अभिषेक करने से स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों में लाभ मिलता है।
  • देवगुरु बृहस्पति की पूजा करके उन्हें पीले फूल अर्पित करने से प्रेम संबंधों में मधुरता आती है।


 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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