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Rang Panchami 2026: इस साल कब मनाई जाएगी रंग पंचमी ? जानें तिथि महत्व और पूजा विधि

Thu, 26 Feb 2026 06:13 PM IST
Megha Kumari धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Rang Panchami 2026: होली के 5 दिन बाद चैत्र कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर रंग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। यह तिथि राधा-कृष्ण को समर्पित है। इस दिन उनकी उपासना से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
 
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Rang Panchami 2026 - फोटो : अमर उजाला
Rang Panchami 2026: रंग पंचमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण और पावन पर्व है। यह हर वर्ष चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन को देव पंचमी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि, इस शुभ तिथि पर देवी-देवता स्वर्ग से पृथ्वी पर आकर होली खेलते हैं। इसलिए इस दिन की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना गया है। इसके अलावा रंग पंचमी पर श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा का अत्यंत शुभ फल साधक को प्राप्त होता है। यह दिन विशेष रूप से श्री कृष्ण और राधा रानी को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि, इस दिन उन्हें गुलाल अर्पित कर होली खेलने से दांपत्य सुख, प्रेम और सौभाग्य में वृद्धि होती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि, 2026 में यह पर्व कब मनाया जाएगा।
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Rang Panchami 2026 - फोटो : freepik
कब है रंग पंचमी 2026 
  • पंचांग के मुताबिक, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 7 मार्च को शाम 7 बजकर 17 मिनट पर हो रही है।
  • इस तिथि का समापन 08 मार्च को रात 09 बजकर 10 मिनट पर होगा। 
  • ऐसे में रंग पंचमी का पर्व 08 मार्च को मनाया जाएगा।
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Rang Panchami 2026 - फोटो : freepik
शुभ मुहूर्त
  • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 5 बजकर 01 मिनट से 05 बजकर 50 मिनट तक
  • विजय मुहूर्त - दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 17 मिनट तक
  • गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 23 मिनट से लेकर 06 बजकर 47 मिनट तक
  • अभिजीत मुहूर्त- 12 बजकर 08 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक

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Rang Panchami 2026 - फोटो : freepik
पूजा विधि
  • रंग पंचमी के दिन एक साफ चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर श्रीकृष्ण और राधा जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • अब आप उन्हें पुष्पमाला पहनाएं और नए वस्त्र अर्पित करें।
  • इसके बाद गुलाल, अबीर और सुगंधित पुष्प अर्पित करें।
  • इस दौरान कुछ मौसमी फल भी पूजा में शामिल कर लें।
  • माखन, मिश्री, फल और मिठाई का भोग लगाएं।
  • दीपक और धूप जलाकर विधिपूर्वक आरती करें।
  • अंत में प्रसाद सभी में बांटें।
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Rang Panchami 2026 - फोटो : freepik

श्रीकृष्ण की आरती

आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला 
श्रवण में कुण्डल झलकाला,नंद के आनंद नंदलाला

गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली
लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक

चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की, आरती कुंजबिहारी की…॥

कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग,  मधुर मिरदंग ग्वालिन संग।

अतुल रति गोप कुमारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥

जहां ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हारिणि श्री गंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस।

जटा के बीच,हरै अघ कीच, चरन छवि श्रीबनवारी की

श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥ ॥ आरती कुंजबिहारी की…॥

चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू 
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू 

हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव फंद।
टेर सुन दीन दुखारी की

श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥

आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

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