मुस्लिम समुदाय के लिए रमजान का महीना बहुत महत्वपूर्ण होता है। मुस्लिम लोग इस महीने में रोजे रखते हैं। इस बार 23 या 24 अप्रैल से रमजान का महीना शुरू होगा। मुस्लिम समुदाय के लोग रमजान का महीना शुरू होते ही, 30 दिन तक रोजे रखेंगे और अल्लाह की इबादत करेंगे। इस्लामिक धर्म के अनुसार रमजान के इस पाक महीने को तीन भागों में बांटा गया है। इस महीने में तीन अशरे होते हैं। आइए, अब जानते हैं, इनके बारें में सबकुछ....
विज्ञापन
2 of 5
रमजान के महीने में 3 अशरे
पहला अशरा
1-10 दिन रहमत का अशरा।
दूसरा अशरा
11-20 दिन गुनाहों की माफी का अशरा।
तीसरा अशरा
21-30 दिन जहन्नम की आग से खुद को बचाने का अशरा।
विज्ञापन
3 of 5
पहला अशरा (1-10 दिन)
रमजान का पहला अशरा रहमत का होता है। इस महीने के पहले 10 दिन में रोजा रखने वालों पर अल्लाह की रहमत होती है। इस्लामिक धर्म के अनुसार इन दिनों में अधिक से अधिक दान करना चाहिए और जरूरतमंद, गरीब लोगों की मदद करनी चाहिए। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों में सभी के साथ प्यार से रहना चाहिए।
4 of 5
दूसरा अशरा (11-20 दिन)
रमजान का दूसरा अशरा माफी का होता है। दूसरा अशरा 11वें रोजे से 20वें रोजे तक चलता है। इस्लामिक धर्म के अनुसार इन दिनों में इबादत कर, अल्लाह से किए गए गुनाओं की माफी मांगी जाती है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार दूसरे अशरे के दौरान जो भी व्यक्ति अपने गुनाहों के लिए मांफी मांगता है, उसे अल्लाह माफ करते हैं।
रमजान का तीसरा यानी अंतिम अशरा जहन्नम की आग से खुद को बचाने के लिए होता है। ये अशरा सबसे महत्वपूर्ण भी माना जाता है। 21वें रोजे से शुरू होकर 30वें रोजे तक ये अशरा चलता है। इस्लामिक धर्म के अनुसार तीसरे और अंतिम अशरे के दौरान अल्लाह से जहन्नम से बचने के लिए दुआ की जाती है।