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इस तरह बना रक्षाबंधन का पवित्र मंत्र, बिना इस मंत्र के राखी बांधने से नहीं मिलता लाभ

Thu, 18 Aug 2016 12:50 AM IST
राकेश्ा झा / टीम डिजिट, अमर उजाला, दिल्ली।
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बंध्‍ान - फोटो : getty images
रक्षबंधन के त्योहार में बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रेशम के रंग ब‌िरंगे धागे बंधती हैं जो राखी कहलाती है। लेक‌िन स‌िर्फ इन धागों को बंध लेना ही काफी नहीं होता है। इन धागों को शक्त‌ि तब म‌िलती है जब आप इनके साथ रक्षाबंधन के मंत्रों को भी बोलें।
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इस तरह बना रक्षा बंधन का पव‌ित्र मंत्र, ब‌िना इस मंत्र के राखी बांधने से नहीं म‌िलता लाभ

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राखी - फोटो : getty images
शास्‍त्रों में कहा गया है क‌ि मंत्रों से रक्षासूत्र आशीर्वाद का कवच बन जाता है जो व्यक्त‌ि की रक्षा करने में सहायक होता है। स‌िर्फ राखी बांध लेने से वह ऋृंगार बनकर रह जाता है इसल‌िए जब भाई की कलाई में राखी बांधे तो बहनों को रक्षाबंधन का मंत्र भी जरूर बोलना चाह‌िए।
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इस तरह बना रक्षा बंधन का पव‌ित्र मंत्र, ब‌िना इस मंत्र के राखी बांधने से नहीं म‌िलता लाभ

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राखी
रक्षा बंधन का मंत्र है " येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल: तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल:।'  इस मंत्र के बनने की कहानी बड़ी ही अनोखी है ज‌िसका सार इसी मंत्र में छुपा है।

इस तरह बना रक्षा बंधन का पव‌ित्र मंत्र, ब‌िना इस मंत्र के राखी बांधने से नहीं म‌िलता लाभ

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राखी
भगवान विष्णु ने वामन बनकर राजा बलि से दान में सब कुछ मांग लिया। राजा बलि को जब भगवान की चाल का ज्ञान हुआ तब उसने वामन भगवान से वरदान मांगा कि हे भगवान आप मेरे साथ पाताल में निवास करें। विष्णु भगवान राजा बलि के साथ पाताल चले गए। इससे माता लक्ष्मी दुःखी हो गई और राजा बलि को दिए वरदान के बंधन से भगवान को मुक्त करवाने के उपाय सोचने लगीं। माता लक्ष्मी वेष बदलकर राजा बलि के पास गयी और राजा बलि को अपना मुंह बोला भाई बना लिया।
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राखी
सावन पूर्णिमा के दिन बलि को देवी ने राखी बांधा। राजा बलि ने जब देवी से राखी बंधने के बदले उपहार मांगने को कहा तो देवी ने भगवान विष्णु को वरदान के बंधन से मुक्त करने का वचन मांग लिया। बलि ने भगवान को वरदान से मुक्त कर दिया और माता लक्ष्मी के साथ बैकुण्ठ लौट आए।
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राखी
रक्षा सूत्र के इसी महत्व के कारण परंपरागत तौर पर राखी का त्योहार सदियों से मनाया जा रहा है। राजा बलि को राखी बांधकर लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को बंधन से मुक्त करावाया। इसी घटना को रक्षाबंधन के मंत्र के रूप में रचा गया।
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